
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (Photo Patrika)
Exclusive Interview:अवध खनन माफिया, जल जीवन मिशन और पावर प्लांटों की राख के निपटान में गड़बड़ी करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे, चाहे कोई कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दृढ़ता के साथ जीरो टॉलरेंस की नीति और सख्त निगरानी का इरादा जाहिर करते हुए कहा कि नक्सल मुक्त हुए बस्तर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों को मुश्किल हालातों से उबारने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। पत्रिका एडिटर्स पैनल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि वन विस्तार, माइनिंग, बांध या किसी अन्य कारण से विस्थापित हुए लोगों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। मुआवजे में गड़बड़ियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।
आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें नई पहचान दिलाने के प्रयास में सरकार पूरी क्षमता से काम कर रही है। किसी को उद्यमी, किसी को खिलाड़ी, उन्नत किसान और युवाओं को स्टार्टअप से जोड़ा जा रहा है। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए पूर्ववर्ती समय में हुए घोटालों पर कार्रवाई की बात कही। मुख्यमंत्री से पत्रिका छत्तीसगढ़ के राज्य संपादक गोविंद ठाकरे, रायपुर संस्करण के स्थानीय संपादक देवेंद्र गोस्वामी और भिलाई संस्करण के स्थानीय संपादक प्रभाशंकर गिरी की लंबी बातचीत के मुख्य अंश…
प्रश्न: रेत व अन्य खनिज तस्करों समेत माफियाओं पर नकेल कसने के लिए सरकार क्या कर रही है?
मुख्यमंत्री: रेत तस्करों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। अवैध रेत उत्खनन और तस्करी रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। इसमें जीरो टॉलरेंस और नई रेत नीति शामिल है। रेत घाटों की ई-नीलामी हो रही है। अवैध रेत खदानों की पहचान के लिए ड्रोन सर्वे और उड़नदस्ता टीमों के माध्यम से निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि माफिया पर लगाम लग सके। दूसरे खनिजों को लेकर भी सख्ती की जा रही है। हर तरह के माफिया पर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कितना बड़ा क्यों न हो।
प्रश्न : जल जीवन मिशन की अधूरी योजनाओं के कारण लोग परेशान हैं। कहीं टंकी बनी है तो कहीं पानी नहीं है, घराें में कनेक्शन हो गया पर जल स्रोत नहीं है?
मुख्यमंत्री : जल जीवन मिशन बहुत अच्छी योजना है। लेकिन पिछली सरकार ने बिना पानी के स्रोत देखे टंकियां खड़ी कर दीं। पाइप बिछा दिए। घर-घर कनेक्शन दे दिए लेकिन पानी नहीं है। हम सरकार में आए तो छह-सात इंजीनियर निलंबित किए। राज्य बजट से 600-700 करोड़ रुपए दिए। अब सुधार हो रहा है। इस साल जल जीवन मिशन 2.0 शुरू हुआ है। उससे फिर पैसा मिलेगा और काम पूरे होंगे।
प्रश्न : आदिवासी समाज की पहचान मुख्यधारा के रूप में हो, इसके लिए क्या प्रयास कर रहे हैं?
मुख्यमंत्री :हमारी भी मंशा है कि आदिवासी मुख्यधारा का व्यक्ति कहलाए। आने वाले समय में उनकी पहचान उद्योगपति, खिलाड़ी, उन्नत किसान आदि के रूप में होगा। कोशिश है कि यह कार्यकाल के पूरा होते-होते यह लक्ष्य लगभग पूरा हो जाए।
प्रश्न : प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या कर रही है?
मुख्यमंत्री : छत्तीसगढ़ में पर्यटन की बहुत संभावनाएं हैं। बस्तर के क्षेत्र में अनेकों वॉटर फॉल हैं। तीरथगढ़ और चित्रकोट बहुत अच्छे हैं। उससे भी अच्छे-अच्छे वॉटर फॉल सामने आ रहे हैं। नई गुफाएं भी हैं। होम-स्टे को बढ़ा रहे हैं। विदेशी लोग आते हैं तो लोग होटल में रहना पसंद नहीं करते बल्कि निजी घरों में रहते हैं।घुरमा रास में बैम्बू राफ्टिंग है। इतना सुंदर गांव है कि पर्यटन के हिसाब से यूनेस्को ने उसका चयन किया है। होटल भी आ रहे हैं। ताज के साथ एमओयू हुआ है, जगदलपुर के पास उनका होटल बनेगा। लोग आएंगे तो पर्यटन बढ़ेगा।
प्रश्न : औद्योगिक शहरों के विकास को लेकर सरकार का क्या विजन है?
मुख्यमंत्री : हम लोग एससीआर बना रहे हैं। स्टेट कैपिटल रीजन। उसके लिए कमेटी का गठन हो गया है। पूरा प्राधिकरण रहेगा और उसको बहुत पावर रहेगा। रायपुर, भिलाई, राजनांदगांव तक उसमें शामिल रहेंगे। उसका पूरा मास्टर प्लान बना रहे हैं कि कैसे विकास किया जाए। सीएसआर से अस्पताल, स्मार्ट क्लास और कई काम करवा रहे हैं। जगदलपुर का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एनएमडीसी के सीएसआर से बना है।
प्रश्न: विस्थापन का दर्द अभी भी कई क्षेत्र में देखा जा रहा है, वन, उद्योग और बांध के लिए विस्थापित किए गए लोगों को पूरा हक नहीं मिला?
मुख्यमंत्री: इसे लेकर पूरे प्रदेश से रिपोर्ट मंगवाएंगे। जिन क्षेत्रों में विस्थापितों को मुआवजा या दूसरी सुविधाएं नहीं मिली हैं, उन्हें दिलवाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करेंगे।
Updated on:
09 May 2026 09:46 am
Published on:
09 May 2026 09:11 am
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