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Indian Railway: रेलवे यात्रियों के साथ धोखा, ऐप में दिखा रहा गाड़ी प्लेटफार्म 1 में आएगी, पहुंची 2 नं में

Indian Railway: ट्रेन के इंतजार में प्लेटफॉर्म-1 में खड़ा रहा, तो दूसरा प्लेटफॉर्म-2 में वहीं साथ की तीसरी यात्री फूट ओवरब्रिज में खड़ी रही। क्योकि रेलवे ही कन्फर्म नहीं कर पा रहा कि ट्रेन किस प्लेटफॉर्म में आएगी।

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Indian Railway: रेलवे यात्रियों के साथ धोखा, ऐप में दिखा रहा गाड़ी प्लेटफार्म 1 में आएगी, पहुंची 2 नं में

रेलवे ऐप में गड़बड़ी (Photo Patrika)

Indian Railway: बात-बात पर यात्री सुविधाओं की बात करने वाला रेलवे ही यात्रियों को धोखे में रख रहा है। स्थिति ऐसी है कि यात्री अब रेलवे के कर्मचारी पर भरोसा करें या रेलवे के बनाए ऐप पर वे खुद असमंजस में फंसे हुए हैं। क्योंकि कभी रेलवे का ऐप ट्रेन के आने की गलत जानाकारी देता है तो, कभी सहायता केंद्र में बैठे हुए कर्मचारी। यहां तक कि टीटीई से पूछने पर भी सही जानकारी नहीं मिल पा रहा है।

ऐसे में आम यात्री किसपर भरोसा करें? क्योंकि इनकी गलती का खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ता है। शुक्रवार को ही एक ऐसे ही घटना यात्रियों के साथ घटी जिसके कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐप में गलत जानकारी के कारण एक यात्री ट्रेन के इंतजार में प्लेटफॉर्म-1 में खड़ा रहा, तो दूसरा प्लेटफॉर्म-2 में वहीं साथ की तीसरी यात्री फूट ओवरब्रिज में खड़ी रही। क्योकि रेलवे ही कन्फर्म नहीं कर पा रहा कि ट्रेन किस प्लेटफॉर्म में आएगी।

इस तरह यात्री हो रहे परेशान, पर रेलवे को परवाह नहीं

केस-1, शुक्रवार को 12810 हावड़ा-मुंबई मेल में यात्री की थर्ड एसी की दो टिकट थी। ट्रेन के रायपुर पहुंचने का समय सुबह 8.40 था। लेकिन ट्रेन अपने निर्धारित समय से करीब ढाई घंटे लेट चल रही थी। सुबह जब व्हेयर इस माय ट्रेन ऐप में देखा तो ट्रेन लेट थी, जिसके कारण यात्री रायपुर से 45 किमी दूर होने के कारण पहले ना आकर लेट आने का फैसला किया। लेकिन जैसे ही ट्रेन ने दूरी रिकवर करना शुरू किया, दोनों यात्री को मजबूरन प्राइवेट गाड़ी करके आनी पड़ा, जिसके कारण भाड़ा भी अधिक लगा।

10.30 बजे यात्री रायपुर स्टेशन पहुंचे, जब ऐप में ट्रेन की लोकेशन 3-4 बार चेक किया तो ट्रेन के रायपुर स्टेशन आने का समय बढ़ता गया, और ट्रेन आने तक प्लेटफॉर्म 1 में ही आने का दिखाया। लेकिन स्टेशन के डिस्प्ले में प्लेटफॉर्म-2 शो कर रहा था। यात्री ने कन्फ्यूज होकर जब सहायता केंद्र पहुंचा तो वहां बैठी महिला ने प्लेटफॉर्म-2 में आने की जानकारी दी, वहीं टीटीई ने प्लेटफॉर्म-1 में आने की कही। इसके परेशान होकर एक यात्री प्लेटफॉर्म-1 में खड़ा रहा, दूसरी महिला फूट ओवरब्रिज पर और छोड़ने आया तिसरा शख्स प्लेटफॉर्म-2 में ट्रेन के डिस्प्ले होने का इंतजार करता रहा और ट्रेन 11.32 को प्लेटफॉर्म-2 में पहुंची।

केस-2,

23 अप्रैल को हर दिन रायपुर से दुर्ग यात्रा करने वाला यात्री 9.30 बजे की ट्रेन 68729 डोंगरगढ़ रायपुर मेमू से दुर्ग के लिए चढ़ा। इस बीच बार-बार वह ट्रेन से लोकेशन चेक करता रहा। लेकिन गाड़ी करीब 45 मिनट लेट चल रही थी। इसलिए काफी समय होने के बाद जब उसने व्हेयर इज माय ट्रेन से लोकेशन चेक किया तो ट्रेन दुर्ग स्टेशन पार कर मुरहीपार स्टेशन बताया। जिससे यात्री हड़बड़ा गया और उसने तुरंत अपने परिचीत को फोन कर आगे के स्टेशन में आने कहा, इसी हड़बड़ी के बीच कुछ समय बाद ट्रेन दुर्ग स्टेशन पहुंच गई। फिर उसने अपने परिचित को फोनकर स्टेशन आने से मना किया।

ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्रियों पर पड़ रहा बोझ

ट्रेन की लेटलतीफी का भार यात्रियों पर पड़ा रहा है, लेकिन रेलवे समय पर ट्रेन चलाने में असमर्थ नजर आ रहा है। क्योकि हर दिन दर्जनों ट्रेन लेट चल रही है, फिर भी रेलवे इसपर सुधार करने में असफल है। उल्टा इसका खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।

आज फिर दर्जनों ट्रेन 4-5 घंटे तक लेट रही

  • गाड़ी 12810 हावड़ा-मुंबई मेल ढाई घंटे लेट।
  • गाड़ी 12129 आजाद हिंद एक्सप्रेस दो घंटे लेट।
  • गाड़ी 68861 गोंदिया-झारसुगुड़ा दो घंटे लेट।
  • गाड़ी 12261 दुरंतो एक्सप्रेस 5 घंटे लेट।
  • गाड़ी 01149 स्पेशल करीब 5 घंटे लेट।