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Hip Dysplasia: चलने पर कूल्हे में दर्द हो सकता है हिप डिस्पलेजिया, जानें क्लीवलैंड क्लिनिक से इसके लक्षण

Hip Dysplasia Cause: चलने पर कूल्हे में दर्द या लंगड़ाहट से हैं परेशान? मेयो और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए हिप डिस्पलेजिया (Hip Dysplasia) के लक्षण, कारण और इलाज की पूरी जानकारी।
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भारत

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Nidhi Yadav

Sep 14, 2026

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कूल्हे में दर्द किस कारण से होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Hip Dysplasia Symptoms: चलते-फिरते या रोज के काम करते वक्त अगर आपके कूल्हे (Hip) में दर्द रहता है, तो इसे सिर्फ थकान मानकर टालने की गलती न करें। अक्सर हम सोचते हैं कि थोड़ा आराम करेंगे तो दर्द ठीक हो जाएगा, लेकिन कई बार यह दर्द किसी अंदरूनी समस्या का इशारा होता है। डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कूल्हे में लगातार बने रहने वाले दर्द की एक बड़ी वजह हिप डिस्पलेजिया (Hip Dysplasia) हो सकती है। यह एक ऐसी दिक्कत है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक, किसी को भी परेशान कर सकती है। आइए बिल्कुल आसान और सीधी-सपाट भाषा में समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और आपको कब सावधान हो जाना चाहिए।

क्या होता है हिप डिस्पलेजिया?

मेयो क्लिनिक के अनुसार, हमारे कूल्हे की बनावट कुछ ऐसी होती है जैसे किसी कटोरी में एक गोल गेंद फिट हो। जांघ की हड्डी का ऊपरी सिरा एक गेंद की तरह होता है और कूल्हे की हड्डी में एक कटोरी (सॉकेट) बनी होती है, जिसमें यह गेंद आराम से घूमती है। जब यह कटोरी सही से नहीं बनती या उथली रह जाती है, तो जांघ की हड्डी इसमें ठीक से बैठ नहीं पाती। इस वजह से जोड़ ढीला पड़ने लगता है और अपनी जगह से खिसकने लगता है। हड्डियों के इसी सही तालमेल न बैठने की स्थिति को डॉक्टरी भाषा में हिप डिस्पलेजिया कहते हैं।

वयस्क लोगों में दिखने वाले मुख्य लक्षण

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, कई बार बचपन में इस बीमारी का पता नहीं चलता और उम्र बढ़ने के साथ जब जोड़ पर दबाव पड़ता है, तब दर्द शुरू होता है। अगर आपको ये समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो ध्यान देने की जरूरत है;

  • जांघ या पेडू (Groin) के पास दर्द।
  • चलने में लंगड़ाहट होना।
  • जोड़ में ढीलापन महसूस होना।
  • आवाज आना या अटकना।

छोटे बच्चों में इसे कैसे पहचानें?

  • एक टांग का छोटा लगना।
  • चमड़ी की सिलवटों में फर्क।
  • डायपर बदलते समय खिंचाव।
  • चलने में परेशानी।

यह समस्या क्यों होती है और किसे ज्यादा खतरा है?

ज्यादातर मामलों में यह दिक्कत जन्म से ही होती है। मां के पेट में जब जगह कम रह जाती है, तो बच्चे के कूल्हे के जोड़ पर दबाव पड़ता है और कटोरी सही आकार नहीं ले पाती। इन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है;

  • लड़कों के मुकाबले लड़कियों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
  • अगर माता-पिता या खानदान में पहले किसी को यह दिक्कत रही हो।
  • पहली डिलीवरी के दौरान गर्भ में जगह थोड़ी कम होती है।
  • अगर जन्म के समय बच्चे के पैर पहले बाहर आ रहे हों (Breech Position)।

अगर ध्यान न दें तो क्या नुकसान हो सकता है?

अगर सही समय पर इसका ध्यान न रखा जाए, तो कूल्हे के जोड़ के बीच की नरम गद्दी (कार्टिलेज) घिसने लगती है। आगे चलकर कम उम्र में ही आर्थराइटिस (गठिया) की समस्या हो सकती है या जोड़ इतना खराब हो सकता है कि हिप रिप्लेसमेंट यानी कूल्हा बदलवाने की नौबत आ सकती है।

इसका पता कैसे चलता है और क्या है इलाज?

डॉक्टर एक्स-रे (X-ray) या अल्ट्रासाउंड करके जोड़ की सही स्थिति देखते हैं। अगर 6 महीने से छोटे बच्चे में इसका पता चल जाए, तो एक खास तरह की पट्टी या ब्रेस पहनाकर जोड़ को सही आकार दिया जा सकता है। इसके लिए किसी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। शुरुआती दौर में फिजियोथेरेपी और कसरतों से आसपास की मांसपेशियों को मजबूत किया जाता है। अगर दिक्कत ज्यादा हो, तो हड्डियों को सही जगह पर लाने के लिए छोटी सर्जरी की सलाह दी जाती है।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

अगर आपको या आपके बच्चे को चलने-फिरने में लगातार दर्द महसूस हो रहा है या कूल्हे के जोड़ में कोई भी अस्वाभाविक बदलाव दिख रहा है, तो बिना वक्त गंवाए हड्डी के डॉक्टर (Orthopedic) को दिखाएं। समय रहते ध्यान देने से यह समस्या पूरी तरह ठीक हो सकती है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।