
कूल्हे में दर्द किस कारण से होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Hip Dysplasia Symptoms: चलते-फिरते या रोज के काम करते वक्त अगर आपके कूल्हे (Hip) में दर्द रहता है, तो इसे सिर्फ थकान मानकर टालने की गलती न करें। अक्सर हम सोचते हैं कि थोड़ा आराम करेंगे तो दर्द ठीक हो जाएगा, लेकिन कई बार यह दर्द किसी अंदरूनी समस्या का इशारा होता है। डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कूल्हे में लगातार बने रहने वाले दर्द की एक बड़ी वजह हिप डिस्पलेजिया (Hip Dysplasia) हो सकती है। यह एक ऐसी दिक्कत है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक, किसी को भी परेशान कर सकती है। आइए बिल्कुल आसान और सीधी-सपाट भाषा में समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और आपको कब सावधान हो जाना चाहिए।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, हमारे कूल्हे की बनावट कुछ ऐसी होती है जैसे किसी कटोरी में एक गोल गेंद फिट हो। जांघ की हड्डी का ऊपरी सिरा एक गेंद की तरह होता है और कूल्हे की हड्डी में एक कटोरी (सॉकेट) बनी होती है, जिसमें यह गेंद आराम से घूमती है। जब यह कटोरी सही से नहीं बनती या उथली रह जाती है, तो जांघ की हड्डी इसमें ठीक से बैठ नहीं पाती। इस वजह से जोड़ ढीला पड़ने लगता है और अपनी जगह से खिसकने लगता है। हड्डियों के इसी सही तालमेल न बैठने की स्थिति को डॉक्टरी भाषा में हिप डिस्पलेजिया कहते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, कई बार बचपन में इस बीमारी का पता नहीं चलता और उम्र बढ़ने के साथ जब जोड़ पर दबाव पड़ता है, तब दर्द शुरू होता है। अगर आपको ये समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो ध्यान देने की जरूरत है;
ज्यादातर मामलों में यह दिक्कत जन्म से ही होती है। मां के पेट में जब जगह कम रह जाती है, तो बच्चे के कूल्हे के जोड़ पर दबाव पड़ता है और कटोरी सही आकार नहीं ले पाती। इन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है;
अगर सही समय पर इसका ध्यान न रखा जाए, तो कूल्हे के जोड़ के बीच की नरम गद्दी (कार्टिलेज) घिसने लगती है। आगे चलकर कम उम्र में ही आर्थराइटिस (गठिया) की समस्या हो सकती है या जोड़ इतना खराब हो सकता है कि हिप रिप्लेसमेंट यानी कूल्हा बदलवाने की नौबत आ सकती है।
डॉक्टर एक्स-रे (X-ray) या अल्ट्रासाउंड करके जोड़ की सही स्थिति देखते हैं। अगर 6 महीने से छोटे बच्चे में इसका पता चल जाए, तो एक खास तरह की पट्टी या ब्रेस पहनाकर जोड़ को सही आकार दिया जा सकता है। इसके लिए किसी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। शुरुआती दौर में फिजियोथेरेपी और कसरतों से आसपास की मांसपेशियों को मजबूत किया जाता है। अगर दिक्कत ज्यादा हो, तो हड्डियों को सही जगह पर लाने के लिए छोटी सर्जरी की सलाह दी जाती है।
अगर आपको या आपके बच्चे को चलने-फिरने में लगातार दर्द महसूस हो रहा है या कूल्हे के जोड़ में कोई भी अस्वाभाविक बदलाव दिख रहा है, तो बिना वक्त गंवाए हड्डी के डॉक्टर (Orthopedic) को दिखाएं। समय रहते ध्यान देने से यह समस्या पूरी तरह ठीक हो सकती है।
Updated on:
14 Sept 2026 08:26 am
Published on:
14 Sept 2026 08:26 am
