
मुरार जिला अस्पताल
ग्वालियर. मुरार जिला अस्पताल में 24 घंटे मरीजों की सेवा और अस्पताल की व्यवस्थाएं संभालने वाले करीब 200 आउटसोर्स कर्मचारियों को पिछले 4 महीने से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों के घरों में चूल्हा जलना दूभर हो गया है। लगातार मिल रही शिकायतों और कर्मचारियों में बढ़ते आक्रोश के बाद आखिरकार स्वास्थ्य संचालनालय (भोपाल) हरकत में आया है। शुक्रवार को संचालनालय की ओर से भेजी गई दो सदस्यीय विशेष जांच टीम—डॉ. नितिन पटेल और डॉ. राजेश त्रिपाठी ने जिला अस्पताल में अचानक दस्तक दी, जिससे अस्पताल प्रबंधन और आउटसोर्स ठेकेदारों में हड़कंप मच गया। भोपाल से आई जांच टीम सुबह करीब 11:30 बजे सीधे सिविल सर्जन कार्यालय पहुंची। अधिकारियों ने किसी को भी भीतर आने-जाने से रोक दिया और आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए काम कर रहे सभी कर्मचारियों की सूची, अटेंडेंस (उपस्थिति) रजिस्टर, ईपीएफ/ईएसआईसी रिकॉर्ड, बैंक ट्रांसफर डिटेल और पेंङ्क्षडग बिलों से जुड़ी तमाम फाइलें अपने कब्जे में ले लीं। टीम ने रात 8 बजे तक यानी लगातार आठ घंटे तक बंद कमरे में फाइलों के एक-एक पन्ने की बारीकी से पड़ताल की।
त्योहारों के बीच भुखमरी, बच्चों की स्कूल फीस के लाले
अस्पताल में दिन-रात पसीना बहाने वाले सफाईकर्मी, सुरक्षा गार्ड, वार्ड बॉय और अन्य सहायक स्टाफ का दर्द यह है कि वे पिछले कई महीनों से वेतन के लिए सिविल सर्जन से लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तक के दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। हर बार उन्हें सिर्फ झूठे आश्वासन का झुनझुना थमा दिया जाता था। हालत यह हो गई है कि किराना दुकानदारों ने कर्मचारियों को राशन उधार देना बंद कर दिया है, मकान मालिक कमरे खाली करने की धमकी दे रहे हैं और बच्चों की स्कूल से नाम कटने की नौबत आ चुकी है।
सवालों के घेरे में ठेकेदार: बजट आया तो पैसा कहां गया?
जांच टीम ने सिविल सर्जन कार्यालय के लेखा (अकाउंट) शाखा के अधिकारियों और क्लर्कों से भी कड़ी पूछताछ की। जांच का मुख्य केंद्र यह रहा कि शासन स्तर से संबंधित ठेका कंपनियों को कब, कितना और किस मद में बजट रिलीज किया गया? यदि शासन से राशि जारी हो चुकी थी, तो ठेकेदार ने कर्मचारियों के बैंक खातों में आरटीजीएस/एनईएफटी क्यों नहीं किया? क्या कागजों पर फर्जी कर्मचारियों के नाम चढ़ाकर उनके नाम का वेतन डकारा जा रहा था?
जांच टीम भोपाल मुख्यालय को सौंपेगी सीलबंद रिपोर्ट
जांच अधिकारियों ने एजेंसी-वार ब्योरा और बैंक खातों का मिलान पूरा कर लिया है। टीम के सदस्यों का कहना है कि वे इस पूरे वित्तीय घालमेल की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर भोपाल मुख्यालय में स्वास्थ्य आयुक्त को सौंपेंगे, जिसके आधार पर दोषी अधिकारियों व ब्लैकलिस्टेड होने वाली एजेंसियों पर सीधी दंडात्मक कार्रवाई होगी।
Updated on:
12 Sept 2026 06:14 pm
Published on:
12 Sept 2026 06:14 pm
