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न ड्रॉफ्ट बने, न चालान जमा हुए…बैंकों पर लटके रहे ताले

पांच दिन का कार्य दिवस लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों के दरवाजे ग्राहकों के लिए बंद रहे। सुबह बैंक खुलने के समय कर्मचारी तो पहुंचे, लेकिन कामकाज नहीं हुआ। शहर की बैंक शाखाओं पर पूरे दिन ताले लटके रहे और जरूरी बैंकिंग कामों के लिए पहुंचे ग्राहक बैरंग लौटते नजर आए। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर हुई अखिल भारतीय बैंक हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों की करीब 225 शाखाओं के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।
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पांच दिन का कार्यदिवस लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों के दरवाजे ग्राहकों के लिए बंद रहे। सुबह बैंक खुलने के समय कर्मचारी तो पहुंचे, लेकिन कामकाज नहीं हुआ। शहर की बैंक शाखाओं पर पूरे दिन ताले लटके रहे और जरूरी बैंकिंग कामों के लिए पहुंचे ग्राहक बैरंग लौटते नजर आए।

बैंककर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल की, इस दौरान महाराज बाड़ा स्थित एसबीआइ शाखा के सामने प्रदर्शन करते बैंककर्मी।

  • पांच दिवसीय कार्य दिवस समेत कई मांगों को लेकर राष्ट्रीयकृत बैंकों में हुई हड़ताल
  • 12 बैंकों की करीब 225 शाखाओं के अधिकारी-कर्मचारी रहे हड़ताल पर

ग्वालियर. पांच दिन का कार्यदिवस लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों के दरवाजे ग्राहकों के लिए बंद रहे। सुबह बैंक खुलने के समय कर्मचारी तो पहुंचे, लेकिन कामकाज नहीं हुआ। शहर की बैंक शाखाओं पर पूरे दिन ताले लटके रहे और जरूरी बैंकिंग कामों के लिए पहुंचे ग्राहक बैरंग लौटते नजर आए। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर हुई अखिल भारतीय बैंक हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों की करीब 225 शाखाओं के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। कर्मचारी नो वर्क-नो पे के आधार पर हड़ताल पर रहे। बैंकिंग सेक्टर से जुड़े जानकारों के मुताबिक, एक दिन की इस हड़ताल से ग्वालियर में करीब 250 करोड़ रुपए का लेन-देन प्रभावित हुआ।

बैंक पहुंचे ग्राहक, लेकिन खाली हाथ लौटे
हड़ताल का सबसे सीधा असर बैंक के काउंटर पर पहुंचने वाले ग्राहकों पर पड़ा। नए खाते खोलने से लेकर रकम जमा-निकासी और अन्य उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े काम अटक गए। सरकारी चालान जमा नहीं हुए, चेक क्लियरिंग थम गई और विदेशी मुद्रा से जुड़े काम भी नहीं हो सके। इसके अलावा लॉकर संचालन, नेफ्ट और आरटीजीएस जैसी बैंकिंग सेवाएं भी प्रभावित रहीं। जिन ग्राहकों को जरूरी भुगतान या बैंकिंग प्रक्रिया पूरी करनी थी, उन्हें अब बैंक खुलने का इंतजार करना होगा।

एटीएम और ऑनलाइन बैंकिंग बनी सहारा
बैंक शाखाओं के बंद रहने के बावजूद आमजन के लिए पूरी तरह बैंकिंग ठप नहीं हुई। जरूरतमंद लोगों ने नकदी निकालने के लिए एटीएम का सहारा लिया, जबकि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए रोजमर्रा के लेन-देन किए गए। हालांकि, जिन कामों के लिए बैंक शाखा में कर्मचारी की जरूरत थी, वे शुक्रवार को पूरी तरह अटक गए।

महाराज बाड़े पर गूंजे विरोध के नारे
हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की महाराज बाड़ा शाखा के सामने एकत्रित हुए। यहां सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की बैंक कर्मचारी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर रोष जताया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स, ग्वालियर के संयोजक विवेक रावत ने कहा कि सरकार ने यदि कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 28 से 30 सितंबर तक फिर हड़ताल की जाएगी। प्रदर्शन के दौरान शैलेश यादव, देवव्रत सिकरवार, सौरभ सिकरवार और देवेंद्र शुक्ला ने भी कर्मचारियों को संबोधित किया।

एक दिन की हड़ताल, लेकिन असर कई सेवाओं पर
बैंक शाखाओं के बंद रहने का असर सिर्फ काउंटर तक सीमित नहीं रहा। चेक क्लियरिंग से लेकर सरकारी चालान और विदेशी मुद्रा तक कई सेवाएं एक दिन के लिए थम गईं। ऐसे में बैंक कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में हुई हड़ताल ने शहर की बैंकिंग व्यवस्था को करीब-करीब 'नो वर्क' मोड में ला दिया।