12 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

ग्वालियर से भोपाल तक फर्जी पासपोर्ट का सिंडिकेट, धर्म की आड़ में कैसे चलता था पूरा खेल?

Fake Passport Network Gwalior- भोपाल में 40 और डबरा में एक ही पते पर बने 17 पासपोर्ट...। नेता से भंते बने दलालों ने रची साजिश...।
2 min read
Google source verification
Fake Passport Network Gwalior

Fake Passport Network Gwalior- लाल घेरे में बांग्लादेशी घुसपैठिया रियाज चौधरी ग्वालियर जेल में है। (फोटो पत्रिका)

Fake Passport Network Gwalior- बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारतीय पहचान दिलाने के खेल में एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क कम से कम 5 जिलों में फैला था। काले कारोबार को अंजाम देने धर्म की आड़ का इस्तेमाल किया गया। प्रदेश में 70 फर्जी पासपोर्ट चिह्नित किए गए हैं। भोपाल में 40, ग्वालियर के डबरा क्षेत्र में एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर पर 17 पासपोर्ट जारी किए गए। बैतूल में 11, पांढुर्ना-छिंदवाड़ा में एक-एक फर्जी पासपोर्ट की पुष्टि हुई है। डबरा के सिमरिया गांव स्थित तथागत बुद्ध विहार और इस साजिश के केंद्र से परतें उधड़ रही हैं।

खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क के पीछे मुख्य सूत्रधार कुछ स्थानीय नेता और दलाल थे। चीनोर (पुरा बनवार) का गयाप्रसाद पहले बहुजन विचारधारा का सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता था। उसने चोला बदला और 'भंते ज्ञानज्योति' बन बैठा। जनकगंज (माधौनगर) के गुलाबराय ने भी भेष बदलकर 'भंते सम्यक बोधि' की उपाधि धारण कर ली।

इसलिए शक नहीं हुआ

बौद्ध भिक्षु के रूप में स्थापित होने से सिमरिया स्थित बुद्ध विहार और आंबेडकर पार्क में इनका आना-जाना सामान्य और संदेह से परे हो गया था। इसी का फायदा उठाकर दोनों ने बांग्लादेशी घुसपैठिए और मास्टरमाइंड रियाल चौधरी के साथ मिलकर डबरा के पते पर फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाने का ठेका ले लिया।

अब तक ये गिरफ्तार

मास्टरमाइंड रियाल चौधरी, विश्लव चौधरी और प्रियांन चौधरी को गिरफ्तार कर ग्वालियर जेल भेज दिया गया है। महाराष्ट्र से पकड़े गए जॉय चौधरी को एसटीएफ ने रिमांड पर लिया है, उससे पूछताछ की जा रही है।

इन बिंदुओं पर पड़ताल

-किन शिक्षकों ने फर्जी आधार, कार्ड, निवास प्रमाण-पत्र, मार्कशीट तैयार करने में मदद की।
-बाहरी और संदिग्ध बांग्लादेशियों को बिना जान-पहचान अपने ठिकानों पर पनाह क्यों दी।
-किन नामों के संस्थाओं के दस्तावेज लगाए गए।
-इन पासपोर्ट से किन-किन देशों की यात्राएं की गईं।
-सत्यापन करने वाले पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी एसटीएफ ने शुरू कर दी है। इस सिंडिकेट के अन्य फरार मददगारों, संदिग्ध शिक्षकों और सह-साजिशकर्ताओं की तलाश में दबिश दे रही है। राजेश सिंह भदौरिया, एसपी, एसटीएफ, भोपाल