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Bhopal news: 70 से ज्यादा ‘फेक पासपोर्ट’ जारी, मास्टरमाइंड को पकड़ने STF रवाना, असम में हो सकती गिरफ्तारी

Fake passport: भोपाल और डबरा के बौद्ध मठ पतों से बांग्लादेशियों के नाम पर दर्जनों फर्जी पासपोर्ट जारी होने का मामला सामने आया है।
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भोपाल

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Astha Awasthi

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Updated: 10 Sep 2026, 9:32 AM IST

फर्जी पासपोर्ट , प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

फर्जी पासपोर्ट , प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Bhopal news: फर्जी पासपोर्ट पर बांग्लादेशियों के विदेशों तक यात्रा का मामला अब मध्यप्रदेश के डबरा से भोपाल तक फैलता नजर आ रहा है। गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अन्ना नगर स्थित एक बौद्ध मठ के पते से 40 पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई है। जांच में यह भी पता चला है, गिरोह बांग्लादेश से भारत आए लोगों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिक बनाता था। इसके बाद आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज तैयार कराकर भारतीय पासपोर्ट बनवाए जाते थे। फर्जी पासपोर्ट के जरिए कई लोग थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान तक की यात्रा कर चुके है।

एसटीएफ की जांच में आया है कि नेटवर्क की जड़े असम, कोलकाता और पश्चिम बंगाल तक फैली हैं। अब तक भोपाल और डबरा के पतों से 70 से ज्यादा पासपोर्ट संदिग्ध तरीके से जारी होने की जानकारी मिली है। इस केस की जांच के लिए एसटीएफ की पांच सदस्यीय टीम असम रवाना हो गई है।

भोपाल का पता बना बड़ा सुराग

जांच में सबसे पहले डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार कॉलोनी के एक ही पते से 30 लोगों के नाम पर पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद भोपाल के गोविंदपुरा अन्ना नगर स्थित मठ का पता जांच के दायरे में आया। यहां से 40 लोगों के नाम पर पासपोर्ट मिले हैं। ये पासपोर्ट 2021, 2022 और 2023 के दौरान जारी हुए थे।

दो आरोपी गिरफ्तार

एसटीएफ एसपी राहुल लोढ़ा ने बताया, गिरोह से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मास्टरमाइंड रियाल चौधरी को जेल भेज दिया गया है। पूछताछ में नेटवर्क के दूसरे लोगों और दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह के बारे में जानकारी जुटाई गई है।

बौद्ध अनुयायी बनकर विदेशों तक यात्रा

फर्जी भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले कुछ लोग खुद को बौद्ध अनुयायी बताकर विदेश यात्रा करते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जाने की जानकारी मिली है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इन यात्राओं के पीछे केवल फर्जी पहचान का इस्तेमाल था या इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी सक्रिय है।

ऐसे तैयार होती थी फर्जी पहचान

गिरोह पहले बांग्लादेश से आए लोगों की पहचान और जरूरी जानकारी जुटाता था। इसके बाद उनके नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पते और पहचान का रिकॉर्ड तैयार कर पासपोर्ट के लिए आवेदन कराया जाता था।

सत्यापन पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल पासपोर्ट जारी होने से पहले होने वाले पुलिस और स्थानीय सत्यापन को लेकर है। एक ही मठ व विहार के पते से दर्जनों लोगों के पासपोर्ट जारी होने के बावजूद सत्यापन में यह गड़बड़ी में नहीं आई, इसकी भी पकड़ी जयरही है। आसटीएफ और पुलिस स्थानीय सत्यापन की प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका भी जांच रही है।

असम में रहता मास्टरमाइंड

गिरोह का मास्टरमाइंड असम में रहता था। वह ऐसे लोगों के संपर्क में था, जो कई साल पहले बांग्लादेश से भारत आए और अलग-अलग शहरों में बस गए थे। एसटीएफ असम सहित अन्य राज्यों में जाकर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों, दस्तावेज बनाने वालों और विदेश यात्रा के कनेक्शन की जानकारी जुटाएगी।