
बच्ची की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)
LRBA Deficiency Symptoms: एक मां-बाप के लिए अपने बच्चे को दर्द में देखना सबसे मुश्किल होता है। दिल्ली की 3 साल की सांची (संस्कृति भगत) और उसका परिवार पिछले कई सालों से ऐसी ही कठिन लड़ाई लड़ रहा है। सांची एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक (Genetic) बीमारी से पीड़ित है और डॉक्टरों का कहना है कि उसकी जान बचाने के लिए जल्द से जल्द बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Bone Marrow Transplant) जरूरी है। इसी उम्मीद में परिवार ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और केंद्र सरकार से इलाज के लिए आर्थिक मदद की मांग की है।
सांची को LRBA Deficiency (Lipopolysaccharide-Responsive Beige-Like Anchor Protein Deficiency) नाम की एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है। यह बीमारी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को प्रभावित करती है, जिससे बार-बार संक्रमण, खून की कमी और कई ऑटोइम्यून समस्याएं हो सकती हैं। परिवार के अनुसार, जन्म के कुछ महीनों बाद ही बच्ची को बार-बार बुखार आने लगा था। साथ ही गंभीर एनीमिया के कारण उसे कई बार खून और प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़े।
AIIMS दिल्ली, CMC वेल्लोर और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों में जांच के बाद 2025 में जीनोमिक टेस्ट से LRBA Deficiency की पुष्टि हुई। इसके बाद चेन्नई के अपोलो अस्पताल के विशेषज्ञों ने बच्ची का मूल्यांकन किया। डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी का स्थायी इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही है। चूंकि पूरी तरह मेल खाने वाला डोनर नहीं मिला, इसलिए बच्ची के पिता को हाफ-मैच्ड (Haploidentical) डोनर के रूप में चुना गया है।
परिवार का कहना है कि अब तक की जांच और इलाज में उनकी सारी जमा पूंजी खर्च हो चुकी है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट और इसके बाद की देखभाल पर करीब 40 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है, इतने पैसे नहीं होने की वजह से परिवार ने सरकार से मदद की मांग की है। उनका कहना है कि इलाज में देरी बच्ची की सेहत को और बिगाड़ सकती है।
जर्नल फ्रंटियर्स इन इम्यूनोलॉजी औरक्लिनिकल इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, LRBA Deficiency एक दुर्लभ लेकिन गंभीर इम्यून डिसऑर्डर है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कई मरीजों में हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (Bone Marrow Transplant) ही दीर्घकालिक और प्रभावी इलाज साबित हो सकता है।
अगर इस बीमारी का समय पर इलाज न मिले तो बार-बार संक्रमण, अंगों को नुकसान और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में जल्द उपचार मरीज की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभाता है। सांची की कहानी सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की हकीकत भी है जो दुर्लभ बीमारियों के इलाज और आर्थिक मदद के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
8 Jun 2026, 12:29 PM IST
Published on:
8 Jun 2026, 12:29 PM IST
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