
जीका वैक्सीन बनाने की फुल प्रूफ तैयारी
जीका से बचाव के लिए टीका बनाने में लगे वैज्ञानिकों ने हॉस्टयून के तीन अस्पतालों का चुनाव किया। इसमें 90 पुरुषों को शामिल किया गया जिसमें कुछ महिलाएं थी जो गर्भवती नहीं थीं। बेयलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन में पहला परीक्षण किया गया जिसमें लोगों को परीक्षण के लिए तैयार वैक्सीन की अलग-अलग डोज दी गई। अब इन लोगों की लंबे समय तक निगरानी चल रही है।
2400 लोगों पर परीक्षण की है तैयारी
वैज्ञानिकों की टीम ने 15 से 35 वर्ष की उम्र के 2400 लोगों पर वैक्सीन का परीक्षण किया है जो अमरीका के अलग-अलग शहरों के रहने वाले हैं। अमरीका के बाद वैज्ञानिकों की टीम ब्राजील के कोस्टा रिका, मेक्सिकों, पनामा, पेरू के रहने वाले लोगों पर शोध की तैयारी कर रही है। परीक्षण में शामिल लोगों की अगले दो साल तक निगरानी होगी जिससे पता चल सके कि उनके भीतर जीका वायरस का इंफेक्शन तो नहीं बढ़ रहा है। वैसे अन्य परीक्षणों के तहत यदि टीका सफल रहता है तो इसी साल के अंत तक इसे आम मरीजों के लिए उपलब्ध करवाया जा सकता है।
वैक्सीन का नहीं है कोई साइड इफेक्ट
जिस वैक्सीन पर परीक्षण चल रहा है उसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। वैज्ञानिकों का ये भी दावा है कि है कि वैक्सीन लगने के बाद जीका वायरस से संक्रमण की गुंजाइश बहुत कम हो जाएगी। वैज्ञानिकों ने डीएनए जैसा एक द्रव्य बनाया है जिसमें जिका वायरस में पाए जाने वाले प्रोटीन की कोडिंग है। जैसे ही टीका लगेगा संक्रमित व्यक्ति के भीतर मौजूद प्रोटीन को वे पकड़ लेगा जिसके बाद शरीर उसके खिलाफ एंटीबॉडीज तैयार कर देगा जिससे वायरस का असर खत्म हो जाएगा। वैज्ञानिको की टीम जीका वैक्सीन के साथ उस दवा के बनाने पर भी काम कर रही है जिससे कोई परेशानी होने पर व्यक्ति की जान खतरे में जाने से बचा लिया जाए।
(वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत)