कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने विकसित किया 'साइटोडिफ्यूजन' एआई। यह सिस्टम रक्त कोशिकाओं में होने वाले उन सूक्ष्म बदलावों को पहचान लेता है, जिससे कैंसर का इलाज समय पर संभव होगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिकित्सा क्षेत्र में भी बड़े बदलाव लेकर आ रही है। ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की अगुवाई में हुए शोध में एक ऐसा जेनरेटिव एआई सिस्टम विकसित किया गया है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियोंं की पहचान करने में सक्षम है। साइटोडिफ्यूजन नाम का यह सिस्टम न सिर्फ रक्त कोशिकाओं का विश्लेषण करने में सक्षम है बल्कि अपनी सीमाओं को पहचानते हुए वह कब अनिश्चित हो सकता है यह भी समझ लेता है। इससे चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के लिए बीमारी की जल्द पहचान और उसके उपचार का रास्ता साफ हो जाता है। यह एआई सिस्टम ल्यूकीमिया जैसे रक्त से संबंधित कैंसर की पहचान करता है। साथ ही इस वजह से कोशिकाओं में हो रहे सूक्ष्म बदलावों का भी विश्लेषण कर लेता है।
साइटोडिफ्यूजन जेनरेटिव एआई के काम करने का तरीका माइक्रोस्कोप के नीचे रक्त कोशिकाओं के बेहद सूक्ष्म अंतर का अध्ययन करने जैसा ही है। यह सामान्य से अलग हट कर दिखने वाली दुर्लभ कोशिकाओं को चिन्हित करता है। डीएएलएल-ई इमेज जेनरेटर की तरह की यह मेडिकल इमेज विश्लेषण के लिए कल्पनाशीलता और उन्नत तकनीक को जोड़ता है। शोधकर्ताओं का जेनरेटिव एआई सिस्टम से संबंधित यह अध्ययन नेचर मशीन इंटेलिजेंस जर्नल में भी प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं के अनुसार साइटोडिफ्यूजन बीमारी की पहचान करने में डॉक्टरों का स्थान नहीं लेगा बल्कि यह डॉक्टरों के लिए संदिग्ध मामलों की जल्द पहचान करने में मदद करेगा। इससे चिकित्सक कैंसर जैसे रोगों का उपचार जल्द शुरू कर सकेंगे। शोधकर्ताओं ने पांच लाख से अधिक ब्लड स्मीयर इमेज का दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक संग्रह भी जारी किया है। इससे विश्व स्तर पर शोधकर्ताओं को नए एआई मॉडल विकसित करने के साथ ही मेडिकल डाटा तक समान पहुंच में सहायता मिलेगी। इसका सीधे तौर पर लाभ रोगियों के बेहतर उपचार में मिलेगा।