स्वास्थ्य

वैज्ञानिकों को इंसान की नाक से मिला नया एंटीबायोटिक पदार्थ

मानव नाक, त्वचा और आंत में सौम्य और रोगजनक दोनों तरह के बैक्टीरिया रहते हैं। ये सूक्ष्मजीव एक साथ रहते हैं जिन्हें माइक्रोबायोम कहा जाता है। यदि माइक्रोबायोम असंतुलित हो जाता है, तो रोगजनक बढ़ सकते हैं और हम बीमार हो जाते हैं।
less than 1 minute read
• •
Dec 28, 2023
nose.jpg

जर्मनी में वैज्ञानिकों की एक टीम ने पहली बार मानव नाक से एक नए एंटीबायोटिक पदार्थ की खोज की है, जिसका इस्तेमाल रोगजनक बैक्टीरिया के खिलाफ किया जा सकता है। एपिफैडिन नाम का यह अणु बैक्टीरिया प्रजाति स्टैफिलोकोकस एपिडर्मिडिस के विशिष्ट उपभेदों से उत्पन्न होता है, जो नाक की अंदरूनी दीवार की श्लेष्मा झिल्ली पर होते हैं।

एपिफैडिन उत्पन्न करने वाले उपभेदों को त्वचा की सतह पर भी अलग किया जा सकता है। ट्युबिंगन विश्वविद्यालय की टीम ने कहा कि एपिफैडिन रोगाणुरोधी यौगिकों का एक नया, पहले से अज्ञात वर्ग है जो सूक्ष्मजीवों को मारता है और नए एंटीबायोटिक दवाओं के विकास के लिए एक प्रमुख संरचना के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

2016 में टीम ने एक अद्वितीय संरचना वाले एक अज्ञात एंटीबायोटिक पदार्थ - लुगडुनिन की खोज की थी। एपिफैडिन अब इस तरह की दूसरी खोज है जो इस कार्य समूह ने मानव माइक्रोबायोम में की है। "नए एंटीबायोटिक दवाओं का विकास दशकों से रुका हुआ है। लेकिन आज उनकी पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है, क्योंकि हाल के वर्षों में हमने दुनिया भर में बहुप्रतिरोधी बगों में तेजी से वृद्धि दर्ज की है। इन संक्रमणों पर नियंत्रण पाना कठिन है और हमारे आरक्षित एंटीबायोटिक्स अब नहीं रह गए हैं।

जीवाणु स्टैफिलोकोकस एपिडर्मिडिस लगभग सभी मनुष्यों के त्वचीय और नाक के माइक्रोबायोम में स्वाभाविक रूप से होता है। माना जाता है कि नया पहचाना गया स्ट्रेन प्रतिस्पर्धी सूक्ष्मजीवों के खिलाफ जीवित रहने के लिए सक्रिय पदार्थ एपिफैडिन का उत्पादन करता है। एपिफैडिन न केवल स्थानीय स्तर पर स्टैफिलोकोकस एपिडर्मिडिस के साथ प्रतिस्पर्धा करने वाले बैक्टीरिया के खिलाफ काम करता है, बल्कि यह आंत और कुछ कवक जैसे अन्य आवासों के बैक्टीरिया के खिलाफ भी प्रभावी है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
28 Dec 2023 09:00 am