स्वास्थ्य

Lung Cancer : सांस फूलना या भूख कम लगना हो सकता है फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती संकेत, जान लीजिए ऐसे ही 9 मामूली लक्षण

Lung Cancer Early Symptoms, : NHS इंग्लैंड ने फेफड़ों और स्तन कैंसर के इलाज के लिए एक क्रांतिकारी "लिक्विड बायोप्सी ब्लड टेस्ट" शुरू किया है। यह टेस्ट खून में मौजूद ट्यूमर DNA के टुकड़ों का विश्लेषण करता है, जिससे इलाज को तेज़ और अधिक सटीक बनाया जा सकेगा।

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Jun 22, 2025
Signs of Lung Cancer

Signs of Lung Cancer : NHS इंग्लैंड कैंसर के मरीज़ों के लिए एक कमाल का नया ब्लड टेस्ट शुरू करने वाला है। ये टेस्ट खास तौर पर फेफड़ों और ब्रेस्ट कैंसर के मरीज़ों के लिए है और दुनिया में पहली बार इस तरह का कोई टेस्ट इस्तेमाल किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया है कि यह टेस्ट सबसे पहले फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) के मरीज़ों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन, अच्छी खबर ये है कि इसे बाद में ब्रेस्ट कैंसर के मरीज़ों के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।

इस टेस्ट को पहले 10,000 लोगों पर आजमाया गया था, जिन्हें नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर था। ये फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) का सबसे आम प्रकार है। इस पायलट प्रोजेक्ट (छोटे पैमाने पर की गई टेस्टिंग) में टेस्ट के नतीजे काफी अच्छे रहे।

इसी सफलता को देखते हुए अब इस टेस्ट का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसका मतलब है कि अब ज्यादा से ज्यादा फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) के मरीज़ों को इसका फायदा मिल पाएगा।

कैसे काम करेगा ये नया टेस्ट?

इस नए टेस्ट को लिक्विड बायोप्सी कहते हैं। इसमें आपके खून का सैंपल लिया जाएगा और फिर खून में कैंसर ट्यूमर के छोटे-छोटे डीएनए के टुकड़े ढूंढे जाएंगे। अभी तक कैंसर का पता लगाने या उसका इलाज तय करने के लिए शरीर से टिशू का टुकड़ा (बायोप्सी) लेना पड़ता था, जो कई बार मुश्किल और दर्द भरा होता है।

क्या फायदे होंगे?

जल्दी इलाज: इस टेस्ट से डॉक्टर को तुरंत पता चल जाएगा कि कैंसर में कौन से खास जेनेटिक बदलाव हुए हैं। इससे वो मरीज़ के हिसाब से सही दवा या इलाज जल्दी शुरू कर पाएंगे।

कम इंतज़ार: टिशू बायोप्सी के लिए इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा, जिससे इलाज जल्दी शुरू हो पाएगा।

आसान और दर्द-रहित: ये सिर्फ एक ब्लड टेस्ट होगा, टिशू बायोप्सी की तरह शरीर से टुकड़ा निकालने का दर्द नहीं होगा।

फेफड़ों के कैंसर के कारण (Causes of Lung Cancer)

फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) तब होता है जब फेफड़ों में कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं, जिससे ट्यूमर बन जाते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सबसे मुख्य कारण धूम्रपान है। इसके अलावा, कुछ आनुवंशिक कारण भी होते हैं और यह प्रदूषण, मोटापा से भी जुड़ा है।

फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) का पता आमतौर पर छाती के सीटी स्कैन से चलता है, और इसका जल्दी पता चलना बहुत जरूरी है।

अगर आपको अपने शरीर में कोई भी ऐसा बदलाव दिखे जो सामान्य नहीं है या जो ठीक नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर की सलाह लेना महत्वपूर्ण है। ज्यादातर मामलों में यह कैंसर नहीं होगा, लेकिन अगर यह है तो शुरुआती चरण में इसका पता चलने से बहुत फर्क पड़ सकता है।

फेफड़ों के कैंसर के 9 ऐसे लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए: (9 Silent Signs of Lung Cancer)

1. सांस फूलना

    अगर आपको उन कामों को करते हुए साँस फूलने लगती है जो आप पहले आसानी से कर लेते थे, या साँस लेने में कोई और दिक्कत महसूस होती है, तो यह एक संकेत हो सकता है।

    2. बार-बार सीने में इन्फेक्शन

      अगर आपको बार-बार सीने में इन्फेक्शन होता है, जो ठीक नहीं होता, या इलाज से भी ठीक नहीं होता, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

      3. लंबे समय से खांसी

        ऐसी खांसी जो ठीक नहीं हो रही हो या जिसका इलाज से भी कोई फायदा न हो, या आपकी पुरानी खांसी में कोई बदलाव या बिगड़ती स्थिति हो तो यह एक चेतावनी हो सकती है।

        4. खांसी में खून आना

          अगर आपको बलगम में खून आता है, चाहे वह थोड़ी मात्रा में ही क्यों न हो, तो यह एक गंभीर लक्षण है।

          5. बिना वजह थकान महसूस होना

            अगर आपको ऐसी थकान महसूस होती है जो आराम करने से भी दूर नहीं होती, या उन गतिविधियों को करते समय थकान होती है जो आप पहले आसानी से कर लेते थे, तो इस पर ध्यान दें।

            6. बिना कोशिश किए वजन कम होना

              अगर आपकी खाने की आदतों या शारीरिक गतिविधियों में कोई बदलाव किए बिना ही आपका वजन कम हो रहा है, तो यह एक चिंताजनक संकेत है।

              7. भूख न लगना

                अगर आपको पहले जितनी भूख नहीं लगती, या आप पहले जितना खाना नहीं खा पाते, तो यह एक लक्षण हो सकता है।

                8. बिना वजह दर्द

                  कंधे का ऐसा दर्द जो धीरे-धीरे बढ़ता जाए, या सीने में लगातार रहने वाला दर्द जो धीरे-धीरे बदतर होता जाए, यह भी एक चेतावनी भरा संकेत हो सकता है।

                  9. आवाज में बदलाव

                    एक और कम ज्ञात लक्षण है आवाज़ का भारी होना या आवाज़ में ऐसा बदलाव आना जो चार से छह हफ़्तों के बाद भी ठीक न हो।

                    Updated on:
                    22 Jun 2025 01:23 pm
                    Published on:
                    22 Jun 2025 01:22 pm
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