
कोरोना के मामले तेजी से कम हो रहे हैं लेकिन सर्दी में वायरस ज्यादा समय तक जिंदा रहते हैं। ऐसे में आशंका है कि कोरोना के मामले सर्दी में बढ़ सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली, मुंबई आदि शहरों के साथ कई दूसरे देशों में ठीक हो चुके मरीजों में दोबारा संक्रमण के मामले देखे गए हैं। जानते हैं इनके बारे में-
इसलिए आशंका
कोरोना वायरस मुंह से निकलने वाली छोटी-छोटी बूंदों (एरोसोल्स) से फैलता है। गर्मी में यह जल्दी वाष्पित हो जाती हैं इसलिए ज्यादा देर तक इसके वायरस नहीं रह पाते हैं लेकिन सर्दी में वाष्पित न होने पर वायरस ज्यादा देर तक जिंदा रहते हैं। सांस छोडऩे, खांसने या छींकने से निकलीं बूंदों के सीधे संपर्क में आने का भी खतरा रहेगा।
अलग स्ट्रेन से दोबारा हो सकता है संक्रमण
कोरोना के कई तरह के स्ट्रेन (प्रकार) हैं। भारत में तीन तरह के स्ट्रेन हैं। अगर एक तरह के स्ट्रेन से कोरोना हो चुका है तो दूसरी बार दूसरे तरह के स्टे्रन से कोरोना का संक्रमण हो सकता है। डेंगू में भी ऐसा ही होता है। अगर एक तरह का डेंगू हो चुका है तो अगली बार दूसरी तरह का डेंगू हो सकता है।
वेंटिलेटर की जरूरत...
कोरोना के री इंफेक्शन के मामले में देखा गया है कि पहली बार मरीज के गले में हल्का खराश, हल्का बुखार, छींके आना आदि हल्के लक्षण थे लेकिन दोबारा संक्रमण होने पर मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ गई थी। सांस लेने में दिक्कत और रिकवरी में भी काफी समय लग रहा है।
इन लोगों को दोबारा होने का खतरा अधिक रहता है
जिन लोगों के शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज कम बनी है। उनमें दोबारा कोरोना होने का खतरा अधिक है। इसलिए भारी काम करने से बचें। पर्याप्त नींद लें और शरीर को आराम दें। तनाव वाले काम न करें। सुबह-शाम व्यायाम करें और हैल्दी डाइट लें। डाइट में प्रोटीन वाली चीजें ज्यादा मात्रा में लें।