
सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर को ‘विंटर डिप्रेशन’ भी कहते हैं। सर्दी बढऩे पर मरीज का मूड खराब होने लगता है। वह थकान व कमजोरी महसूस करता है। अकेला और गुमसुम रहने लगता है। इसको हल्के में न लें। सर्दी में बाइपोलर डिसऑर्डर के रोगियों की परेशानी भी बढ़ जाती है।
स र्दी बढऩे से शरीर में बनने वाले हार्मोन सेरोटोनिन और मेलाटोनिन की मात्रा घट जाती है। इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। इसके साथ ही सर्दी में धूप कम मिलती है जिससे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक (जैविक घड़ी) बिगड़ जाती है। इससे डिप्रेशन होता है। मरीज का किसी काम में मन नहीं लगता है।
बचाव : नियमित धूप में बैठें। बायोलॉजिक क्लॉक सही होगी। कई शोधों में कहा गया है कि विटामिन डी से भी तनाव कम होता है। नियमित व्यायाम करें। एक्टिव रहें। डिप्रेशन के रोगी दवा न छोडें। हैल्दी डाइट भी जरूरी है।
इलाज : इसमें दवाइयों के साथ विशेष फोटोथैरेपी की जाती है। यह सूर्य की किरणों जैसी लाइट होती है। ऐसे कमरों में मरीज को थोड़ी देर रखते हैं। इससे लाभ मिलता है।
डॉ. आर.के. सोलंकी, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, एसएमएस मेडिकल कॉलेज