
जब कोई व्यक्ति प्राणायाम में ॐ (ओम) का उच्चारण करता है तो उससे कई तरंग दैध्र्य (फ्रीक्वेंसी) निकलती हैं। इसे हम महसूस तो नहीं कर सकते हैं लेकिन इसके उच्चारण से न केवल हम अच्छा महसूस करते हैं बल्कि शारीरिक, मानसिक और दिमागी स्तर पर भी इसका लाभ मिलता है। नियमित करने से व्यक्ति संपूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है। जानते हैं ब्रह्म नाद के बारे में विस्तार से-
इसमें ॐ शब्द की साधना की जाती है। ॐ शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है...अ उ म। अ का अर्थ निर्माण करना, उ का अर्थ उठना यानी विकास और म का अर्थात मौन होना ( ब्रह्मलीन होना)। अ, मस्तिष्क (विचार) का केंद्र, उ हृदय (प्रेम) और म नाभि (चेतना) का केंद्र है। इससे तीनों का अभ्यास होता है।
शारीरिक मजबूती
हृदय की पंपिंग क्रिया बढ़ती
फेफड़ों, हृदय और मस्तिष्क का व्यायाम होता है। फेफड़ों व मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। हृदय की पंपिंग क्रिया में सुधार होता है। शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन अधिक मिलने से कमजोर सेल्स भी सक्रिय होते हैं। कार्बन डाइ ऑक्साइड घटती और शरीर ऊर्जावान होता है। उच्चारण से गले में कंपन से थायरॉइड में लाभ होता है। कई महिला रोगों से भी बचाव होता है।
मानसिक लाभ
डिप्रेशन, एंजायटी से बचाव
इससे दिगाम शांत रहता है। तनाव, उलझन, अवसाद आदि मानसिक रोगों से बचाव होता है। इस युग को ऐज ऑफ एंजायटी भी कहा जाता है। तनाव से डायबिटीज, थायरॉइड, हार्ट डिजीज, आर्थराइटिस, ब्लड प्रेशर, कैंसर, हड्डियों आदि से जुड़े रोगों का खतरा बढ़ता है। अनिद्रा की समस्या है तो नियमित रात में सोते समय इसका उच्चारण करने से भी लाभ मिलता है। खराब आदतें भी छूटती हैं।
दिमागी सेहत
अच्छे हार्मोन्स बढ़ते हैं
मस्तिष्क में कई तरह के हार्मोन्स होते हैं जो हमारी सेहत के लिए जिम्मेदार हैं। ओम के उच्चारण से मन प्रसन्न रहता है। हम अंदर से खुश होते हैं जिससे शरीर में हैप्पी हार्मोन्स डोपामिन, ऑक्सोटोसिन, सेरोटोनिन, एंडोरफिन का स्तर बढ़ता है। छात्रों को इसका सही तरह से उच्चारण सीखकर नियमित १०-१५ मिनट करना चाहिए। इससे स्मरण शक्ति बढ़ती है और ध्यान भी केंद्रित होता है।