
जयपुर. थैरेपीज का नाम सुनते ही एक बार के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट दिमाग में आता है। लेकिन कुछ ऐसी थैरेपीज भी हैं, जो दर्द और दवाइयों से दूर रहते हुए खेल=खेल में मेंटल स्ट्रेस को दूर करती हैं। हम बात कर रहे हैं प्ले, हॉर्टिकल्चर और बिबलियो थैरेपीज की, जो न सिर्फ मूड को फ्रेश करती हैं, बल्कि हेल्थ के लिए बेनिफिशियल भी साबित होती है। इन्हें घर पर भी आसानी से किया जा सकता है। खास बात यह है कि आप हर उम्र में इन्हें शुरू कर सकते हैं।
प्ले थैरेपी
जिस तरह एक बच्चे की मेंटल हैल्थ के लिए उसका खेलना-कूदना जरूरी होता है, उसी तरह प्ले थैरेपी बड़ों के लिए भी बेनिफिशियल साबित हो सकती है। खेल खेलने से बच्चों के ब्रेन का डवलमेंट होता है। ऐसे में गेम्स सेल्फ हीलिंग का काम करते हैं, जो माइंड के लिए बेस्ट थैरेपी कही जा सकती है। डॉक्टर्स भी स्टेमिना बढ़ाने से लेकर पर्सनैलिटी डवलमेंट के लिए प्ले थैरेपी को प्रमोट करते हैं। यहीं नहीं, इससे एक्सरसाइज भी होती है।
बिबलियो थैरेपी
बिबलियो थैरेपी एक डिफरेंट हीलिंग प्रक्रिया है। बिबलियो से मतलब स्टोरी टैलिंग से हैं, जिसमें बुक्स पढऩा, स्टोरीज सुनना और शब्दों को लिखना शामिल हैं। इसे राइटिंग थैरेपी से जोड़कर भी देखा जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक डिप्रेशन के ट्रीटमेंट में बिबलियो थैरेपी लाभदायक साबित होती है। इस थैरेपी के रिजल्ट भी लम्बे समय में नजर आते हैं, लेकिन बेहद इफेक्टिव रहते हैं।
हॉर्टिकल्चर थैरेपी
अमरीकन हॉर्टिकल्चर थैरेपी एसोसिएशन ने हॉर्टिकल्चर थैरेपी को खास तरीके से डिफाइन किया है। एसोसिएशन के मुताबिक किसी व्यक्ति को गार्डनिंग या फिर प्लांट बेस्ड एक्टिविटीज में व्यस्त करके ट्रीटमेंट किया जा सकता है। प्लांट्स के करीब आने से आंतरिक सुकून मिलता है। प्लांट्स को देखने से पॉजिटिव इमोशंस जनरेट होते हैं, जो लाइफ को देखने का नजरिया बदल देते हैं। गार्डनिंग से तनाव, नकारात्मकता और उदासी को दूर किया जा सकता है।
बदलती लाइफ में जरूरी
ये थैरेपीज बदलती लाइफ स्टाइल डिजीज जैसे हारपरटेंशन, डिप्रेशन, स्ट्रैस और नैगेटिव थॉट्स को दूर करती है। वहीं खेलना हर उम्र के लिए लाभदायक रहता है, इससे बॉडी में स्फूर्ति बनी रहती है। ऐसे में प्ले थैरेपी लाइफ में नई एनर्जी लाती है, यदि आप खेल से दूर रहते हैं, तो आज से भी इन थैरेपीज का आनन्द ले सकते हैं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।