
कोरोना संक्रमण (COVID-19) के वुहान शहर (VUHAN CITY) में फैलने के साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WORLD HEALTH ORGANISATION) की ओर से दुनिया भर के देशों के लिए हैल्थ एडवाइजरी जारी कर दी गई थी। डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 के सबसे सामान्य लक्षणों में ठंड लगना, गले में खराश, बुखार, अनियमित थकान, सांस की तकलीफ और सूखी खांसी को शामिल किया था। लेकिन हाल ही चिकित्सकों ने एक नया लक्षण भी बताया है जो दुनिया के अलग-अलग देशों में दिखाई दिया है। डॉक्टर इसे 'कोविड-टो' (COVID-TOE) कह रहे हैं। हालांकि, अब भी डब्ल्यूएचओ की ओर से इस नए लक्षण की पुष्टि किया जाना बाकी है। लेकिन जिन देशों में यह 'न्यूफाउंड' और असामान्य लक्षण सामने आया है वहां इसे लेकर हड़कंप मचा हुआ है। अचानक, ही दर्जनों देशों में कोरोना संक्रमित मरीज़ अपने पैरों की उंगलियों पर चकत्ते देख रहे हैं जो 'चिलब्लेन्स' से मिलते-जुलते हैं। दुनियाभर में डॉक्टर पैर की ऐसी संक्रमित उंगलियों की रिपोर्ट करने वाले मरीजों की संख्या से हैरान हैं। हालांकि, वे इसे बहुत बड़ा लक्षण नहीं मान रहे हैं क्योंकि यह आमतौर पर बेहद ठंडी सर्दियों के दौरान होता है। हालांकि यह एक ऐसा लक्षण भी है जिसे सीधे तौर पर नकारा नहीं जा सकता।
क्या है यह 'कोविड-टो' लक्षण
इस लक्षण से ग्रसित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब त्वचा विशेषज्ञ भी कोविड-टो को कोरोना वायरस के नए लक्षण के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यह कोरोनवायरस का एक सटीक संकेत है जिसमें पैर का रंग पहले बैंगनी और फिर नीला पड़ जाता है। पैर की अंगुली की त्वचा चिलब्लेन्स की तरह दिखती है और अक्सर इसे छद्म चिलब्लेन्स के रूप में देखा जाता है। यह संकेत अब कोरोना वायरस का एक महत्वपूर्ण संकेत बन रहा है, जिसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
बच्चों और युवाओं में ज़्यादा
COVID-19 TOE दरअसल, पैर की अंगुलियों में आमतौर पर संक्रमण के स्पाइक के कई सप्ताह बाद लोगों के एक बड़े समूह में देखने को मिली है। चिलब्लेन्स के अलावा पांव की उंगलियों में सूजन, खुजली और दाद जैसा घाव भी हो सकता है। जख्म कई बार इतनी गहराई के होते हैं कि चलने-फिरने में भी परेशानी आने लगती है। चिकित्सकों ने अभी तक आए मरीजों की संख्या के आधार पर बताया कि सीओवीआईडी-19 पॉजिटिव रोगियों में लगभग 20 प्रतिशत संक्रमितों मेंं यह लक्षण होता है। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह आमतौर पर बच्चों और युवा वयस्कों में ज्यादा होता है।
कोविड-टो यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी
इस बीच राहत की खबर यह है कि इन घावों के बावजूद रोगियों की इम्यूनिटी पॉवर अच्छी होती है। इसलिए लोगों को डरने की जरुरत नहीं है। लेकिन ऐसे रोगियों को अपने आपको और दूसरों को वायरस के संपर्क में लाने के लिए आपातकालीन और जोखिम वाली जगहों पर नहीं जाना चाहिए। ऐसे रोगी को बार-बार सार्वजनिक स्थानों पर जाने की बजाय उन्हें आराम करना चाहिए और अगर खुजली होती है, तो उन्हें स्थानीय हाइड्रोकार्टिसोन की मदद लेनी चाहिए। यदि दर्द हैतो रोगी एस्पिरिन ले सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में घर के बाकी सदस्यों और लोगों से सामाजिक दूरी बनाकर रखें।
युवाओं से सबसे ज़्यादा फैल रहा कोरोना
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण फैलाने में 20 से 40 साल की उम्र वालों का सबसे बड़ा हाथ है। WHO ने कहा है कि इनमें से ज़्यादातर को पता ही नहीं है वो कोरोना से संक्रमित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के वेस्टर्न पैसिफिक के क्षेत्रीय निदेशक ताकेशी कासाई ने कहा कि कोरोना के फैलने का ख़तरा अब और बढ़ गया है। यह बुज़ुर्गों, बीमार लोगों और जो घनी आबादी वाले इलाक़ों में रहते हैं उनके लिए और जोखिम है।
कोविड-टो से संक्रमित रोगी को यह समझना होगा कि हमारा शरीर कोरोना वायरस के संपर्क में आया है, इसलिए हमारा शरीर इसके विरुद्ध प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा कर रहा है। इसलिए अगर पांव की उंगलियों का रंग बैंगनी या नीले अथवा लाल रंग की हो गई हैं तो घबराएं नहीं और तरंत त्वचा विशेषज्ञ या प्राथमिक स्वास्थ्य चिकित्सक को दिखाएं। यदि आवश्यक हो तो कोरोना जांच भी करवाएं।