
सेतु बंधासन
इससे मुख्य रूप से गर्दन, कमर और घुटनों की हड्डियों को मजबूती मिलती है। इसे नियमित करने से मांसपेशियों में लचीलापन और मजबूती आती है। नई कोशिकाओं का विकास अच्छे से होता है। कमर पर अधिक जोर पड़ता है। जिन्हें सर्वाइकल, कमर दर्द है इस आसन को न करें।
भुजंगासन
इसे कोबरा पोज भी कहते हैं। सूर्य नमस्कार में ऐसे पोज करते हैं। इसे रीढ़ की हड्डी पर असर पड़ता है। इससे हड्डियों की मजबूती के साथ लोअर-बैक सपोर्ट भी अच्छा हो जाता है। इस आसन से कलाइयों की हड्डियों में भी मजबूती आती है और अंगुलियां में गठिया की परेशानी है तो आराम मिलता है।
अधोमुख शवासन
इस आसन में पैर, कमर, रीढ़ की हड्डियों पर जोर पड़ता है लेकिन सभी हड्डियों को मजबूती मिलती हैं। अधोमुख शवासन करने से गठिया जैसे रोगों में लाभ मिलता है। जिन्हें गठिया की शुरुआत हो रही है वे भी आसन को करते हैं तो आराम मिलेगा। आसन करते समय चक्कर आता है तो विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।
उत्कटासन
इसे चेयर पोज भी कहते हैं। इसमें कुर्सी पर बैठने जैसा पोज लगाना होता है। इससे पूरे शरीर की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं। इससे सहनशक्ति बढ़ती हैं। सीना और कंधा भी मजबूत होता है।
वृक्षासन
इसमें दोनों हाथों को जोडकऱ एक पैर पर खड़ा होना होता है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। इससे रीढ़, कमर और पेडू की हड्डी भी मजबूत होती है। इससे एकाग्रता भी बढ़ती है।
सूर्यनारायण सिंह, योग विशेषज्ञ, मुंबई (आप कंगना रनौत के योग ट्रेनर हैं)