
सिंहासन
इसमें लंबी सांस लेना और जीभ को गालों की तरफ बाहर की ओर घुमाना होता है जिससे गले की मांसपेशियों पर खिंचाव आता है। सिंह की तरह दहाडऩे से भौंहे खिंचती हैं। इससे चेहरे की चमक बढ़ती है। हार्ट के रोगी इसे न करें क्योंकि इस आसन से हृदय पर दबाव पड़ता है।
दंड भुजंगासन
दंड भुजंगासन में हाथ जमीन पर रखकर गर्दन को ऊपर की ओर उठाना होता है। गर्दन को ऊपर ले जाते समय सांस लेते हैं जबकि गर्दन को नीचे की तरफ लाते हुए सांस छोडऩी होती है। इससे गर्दन और चेहरे दोनों ही हिस्सों पर खिंचाव आता है। इससे गर्दन और चेहरे की मांसपेशियों में मजबूती आती है। चेहरे की चमक बढ़ती है। जिन्हें कमर की तकलीफ है वे इस आसन को करने से बचें।
धनुरासन
यह आसन रीढ़ से लेकर गर्दन, चेहरे व सिर तक की मांसपेशियों के लिए अच्छा होता है। पीठ के हिस्सों को भी मजबूत और लचीला बनाता है। इसमें गर्दन को ऊपर की दिशा में रखते हैं जिससे वहां खिंचाव होता है। यह आसन चेहरों की झुर्रियों को घटाता है। जिन्हें पेट और रीढ़(स्पाइन) संबंधी समस्या है तो वे इस आसन को न करें। इस बारे में विशेषज्ञ से भी सलाह लें।
हस्त उत्तानासन
इसे स्टैंडिंग पोजिशन में किया जाता है। हाथ को ऊपर की ओर ले जाकर पीछे झुकना होता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि कमर आगे की ओर न झुके। इसमें गर्दन को पीछे की ओर ले जाने से गर्दन और चेहरे के आसपास की सभी मांसपेशियों में खिंचाव होता है। चेहरे पर चमक आती है। किसी भी स्थिति में ज्यादा जोर न लगाएं। कोई भी आसन करते समय अधिक जोर लगाने या शरीर में दबाव डालने की मनाही होती है।
शीर्षासन
जब सिर के बल व्यक्ति खड़ा होता है तो सिर को भरपूर मात्रा में ब्लड की सप्लाई होती है। यह लाभ बैठने या लेटने के दौरान नहीं मिलता है। ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होने से चेहरे की मांसपेशियों की ग्रोथ भी अच्छी होती है। नए सेल्स भी बनते हैं। लेकिन जिन्हें हार्ट और हाई बीपी की समस्या है वे इस आसन को न करें
सूर्य नारायण सिंह, अभिनेत्री कंगना रानौत के योग ट्रेनर हैं।