स्वास्थ्य

स्पोर्ट्स इंजरी से बचने के लिए, व्यायाम करने से पहले करें वार्मअप

घुटनों में दो या तीन छेद के जरिए लिगामेंट्स, कुशंस इंजरी का इलाज करते हैं। इसमें टांके, दर्द कम और रिकवरी तेज होती है।
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Updated: 30 Mar 2019, 5:59 PM IST
Do a warm-up before exercising.
स्पोर्ट्स इंजरी से बचने के लिए, व्यायाम करने से पहले करें वार्मअप

व्यायाम से पहले मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ाने के लिए 15-20 मिनट वार्मअप कर बचें स्पोट्र्स इंजरी से

बचपन में लगी चोट का समय से व सही तरीके से इलाज कराना जरूरी होता है। यदि फ्रैक्चर हुई हड्डी खुद जुड़ेगी तो संभव है कि वह गलत तरीके से जुड़े। इससे हाथ-पांव छोटे हो सकते हैं। हड्डी सही तरीके से जुड़े इसके लिए डॉक्टर हड्डी को सही जगह बिठाते हैं फिर प्लास्टर करते हैं। हड्डी के गलत जुडऩे से भविष्य में खिलाड़ी बनने का सपना भी टूट सकता है। स्पोट्र्स इंजरी से जुड़े प्रमुख सवालों के जवाब विशेषज्ञों ने दिए।

इनसे जोड़ मजबूत

लिगामेंट्स: लिगामेंट्स घुटनों को स्थिर रखने का काम करते हैं। दो हड्डियों को जोड़ते व लचीलापन बढ़ाते हैं। ये चार तरह के होते हैं- दो घुटने में और दो बाहरी हिस्से में।
कुशन : घुटने सुरक्षित रखने के लिए दो कुशन होते हैं। जब हम दौड़ते हैं या उछलते हैं तो जोड़ों को झटकों से बचाते हैं।
टेंडेंस : जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोडऩे का काम करते हैं। यह जोड़ों को सुरक्षित रखने का भी काम करते हैं।

स्पोर्ट्स इंजरी हो जाए तो कैसे करें पहचान

सवाल- स्पोट्र्स इंजरी की पहचान के लिए कौन सी जांचें करते हैं?
जवाब- चिकित्सक मरीज की चोट अच्छी तरह से जांचता-परखता है। हड्डियों में चोट के लिए एक्स-रे कराते हैं। लिगामेंट में चोट के लिए सोनोग्राफी, एमआरआई कराते हैं।

सवाल- इलाज कैसे करते हैं?
जवाब- चोट की रिकवरी के लिए दवाएं देते हैं। चोट गहरी व फ्रैक्चर होने पर सर्जरी की जाती है। स्पोट्र्स इंजरी ज्यादातर दूरबीन से की जाती है। लिगामेंट्स, कुशंस इंजरी का इलाज घुटनों में दो या तीन छेद के जरिए करते हैं। इसमें टांके कम आते हैं। दर्द कम और रिकवरी तेज होती है।

सवाल- ऑर्थोस्कोपी क्या है?
जवाब- दूरबीन से सर्जरी की जाती है। घुटने व कंधे के लिगामेंट इंजरी और जोड़ों में फ्रैक्चर की सर्जरी की जाती है। इसका प्रयोग घुटना प्रत्यारोपण के लिए नहीं किया जाता।

डॉ. अमित अग्रवाल
ऑर्थोपेडिक सर्जन, जयपुर

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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