
धुंधलापन और सुस्ती भी
इन दवाइयों से आंखों में धुंधलापन, नींद-सुस्ती रहने, भ्रम की स्थिति, लो बीपी से चक्कर आने, फैसला लेने व संतुलन बनाने में दिक्कत, कान के भीतरी हिस्से में भारीपन आदि समस्या हो सकती है।
5 तरह की दवाइयां लेते हैं
अमरीका में हुए सर्वे के मुताबिक 45-64 साल व 65 से अधिक उम्र के 16 से 39त्न मरीज डॉक्टरी सलाह पर महीनेभर में पांच या उससे ज्यादा तरह की दवाइयां लेते हैं। बुढ़ापे में शारीरिक क्षमता घटने से भी परेशानी।
इन बीमारियों में लेनी पड़ती है कई दवाइयां
डिप्रेशन, एंजायटी और अनिद्रा की अधिकतर दवाइयों में ऐसे सॉल्ट होते हैं जिससे चक्कर आने की समस्या हो सकती है। एकसाथ कई दवाइयां भी लेनी पड़ती हैं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कुछ पेन किलर, बुजुर्गों को दी जाने वाली कई दवाइयों से भी चक्कर आने की समस्या हो सकती है। अगर दवा लेने के बाद चक्कर आते हैं तो अपने डॉक्टर को तुरंत बताएं।
मौसम के अनुसार डोज
लंबे समय तक चलने वाली दवाइयों (बीपी-शुगर आदि) के डोज मौसम के अनुसार भी तय होते हैं। सर्दी में डाइट बढ़ जाती और एक्टिविटी घट जाती है। इसलिए सर्दी में दवा की खुराक अधिक और गर्मी में कम रखते हैं। डॉक्टर को नियमित दिखाते रहें। बुजुर्गों में नींद और दर्द की दवाइयों से भी चक्कर आते हैं। मन से दवाएं न लें। संतुलन के लिए सिर-गर्दन की व्यायाम भी कारगर होते हैं।
डॉ. सुनील वर्मा, सीनियर फिजिशियन, लखनऊ