
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बीते सप्ताह शुक्रवार को चार संभावित दवाओं के वैश्विक परीक्षण के मेगाट्रायल की अनुमति दी है। इस प्रोजेक्ट को 'सोलिडेरिटी' नाम दिया गया है। इन दवाओं में कोरोना वायरस का इलाज देखा जा रहा है। इनमें से एक दवा का एचआइवी वायरस, दूसरी का II विश्व युद्ध के दौरान पहली बार मलेरिया के इलाज में और तीसरी एंटीवायरल दवा का उपयोग बीते साल इबोला वायरस पर किया जा चुका है। वहीं शोधकर्ताओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां इस वायरस का इलाज ढूंढने की दिशा में सार्स और मर्स से संक्रमित पशुओं के इलाज में अच्छा प्रदर्शन करने वाली एक अन्य दवा को भी देख रहे हैं। लेकिन क्या इनमें से कोई भी दवा कोरोनोवायरस के रोगियों को गंभीर नुकसान या मृत्यु से बचा सकती है? इसका उद््देश्य यह पता लगाना है कि इनमें से कौन सी दवा कोरोना वायरस के इलाज में कारगर साबित हो सकती है।
यह एक अभूतपूर्व प्रयास है। कोरोना वायरस से संक्रमित 15 फीसदी रोगी गंभीर संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। डब्ल्यूएचओ के वैज्ञानिक कोरोना वायरस के संक्रमण को धीरे या पूरी तरह से खत्म कर देने की क्षमता रखने वाली इन दवाओं को सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस-2 कह रहे हैं। यह दवा severe रूप से संक्रमित रोगी की जान बचा सकती है। इ्तना ही नहीं यह देखभाल में लगे चिकित्साकर्मियों को भी सुरक्षित रखेगी जिन्हें संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है। इसके अलावा इन दवाओं के इलाज से रोगी के वेंटिलेटर तक जाने की गंभीर स्थिति को भी रोका जा सकेगा।
वैज्ञानिक कोरोना वैक्सीन तैयार करने के लिए अलग-अलग कम्पांउन्ड्स का सुझाव दे रहे हैं लेकिन डब्ल्यूएचओ के वैज्ञानिक सिर्फ चार बेहद खास यौगिकों (ड्रग्स) पर ही भरोसा कर रहे हैं। इनमें से एक है एंटीवायरल कंपाउंड रेमडेसिवियर, मलेरिया की दवा क्लोरोक्वाइन और हाइड्रोऑक्सीक्लोरोक््रवाइन, दो एचआईवी दवाओं लोपिनाविर व रीटोनेविर और इंटरफेरोन बीटा लो कि एक इम्यून सिस्टम कंपाउंड है। डब्ल्यूएचओ के वैज्ञानिकों को पूरा भरोसा है कि इनमें से कोई न कोई दवा कोरोना वायरस को रोकने या खत्म करने में सफल रहेगी।