
Why Fever Happens: जब शरीर का तापमान बढ़ जाता है और थर्मामीटर 100°F या उससे अधिक दिखाने लगता है, तो ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बुखार हमेशा कोई दुश्मन नहीं होता? कई बार यह इस बात का संकेत होता है कि आपका शरीर किसी संक्रमण या बीमारी से लड़ने की कोशिश कर रहा है।
Harvard Health, Mayo Clinic, MedlinePlus और Cleveland Clinic के अनुसार बुखार शरीर का एक प्राकृतिक रक्षा तंत्र (Defense Mechanism) है, जो वायरस, बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्वों के खिलाफ काम करता है।
हमारे मस्तिष्क में हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) नाम का एक हिस्सा होता है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। सामान्य तौर पर शरीर का तापमान लगभग 98.6°F (37°C) के आसपास रहता है। जब शरीर में कोई संक्रमण होता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) कुछ रसायन छोड़ती है जिन्हें Pyrogens कहा जाता है। ये रसायन हाइपोथैलेमस को शरीर का तापमान बढ़ाने का संकेत देते हैं। इसके परिणामस्वरूप बुखार आ जाता है।
शरीर का तापमान बढ़ाने के पीछे एक खास वजह होती है। अधिक तापमान कई वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण नहीं रहने देता। साथ ही यह प्रतिरक्षा कोशिकाओं को अधिक प्रभावी ढंग से काम करने में मदद कर सकता है। यानी बुखार कई मामलों में शरीर की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा होता है।
अक्सर लोग पूछते हैं कि बुखार होने पर शरीर गर्म होता है, फिर ठंड और कंपकंपी क्यों लगती है? इसका कारण यह है कि हाइपोथैलेमस शरीर का नया तापमान लक्ष्य बढ़ा देता है। तब शरीर उस नए तापमान तक पहुंचने के लिए मांसपेशियों को तेजी से सिकोड़ता है, जिससे कंपकंपी होती है और व्यक्ति को ठंड महसूस होती है।
Mayo Clinic के अनुसार बुखार के कई कारण हो सकते हैं:
Harvard Health के अनुसार हल्का बुखार हमेशा तुरंत दबाने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। हालांकि यदि बुखार बहुत अधिक हो, लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ सांस लेने में परेशानी, भ्रम, दौरे या गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
यदि बुखार कई दिनों तक बना रहे, 103°F (39.4°C) या उससे अधिक पहुंच जाए, या गंभीर लक्षणों के साथ हो, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।