स्वास्थ्य

Women Common Diseases: पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को होती हैं ये 5 बीमारियां, क्या आप भी नजरअंदाज कर रही हैं ये लक्षण?

Women Common Diseases: थायरॉइड, PCOS, ऑस्टियोपोरोसिस और एनीमिया जैसी कई बीमारियां महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखी जाती हैं। जानिए इनके लक्षण और बचाव के तरीके।
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Mar 10, 2026
Women Common Diseases
Women Common Diseases (Photo- gemini ai)

Women Common Diseases: महिलाओं की सेहत सिर्फ खान-पान या लाइफस्टाइल से ही नहीं, बल्कि शरीर के हार्मोन, बायोलॉजी और जीवन के अलग-अलग चरणों से भी जुड़ी होती है। इसी वजह से कई ऐसी बीमारियां हैं जो पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती हैं। समस्या यह है कि कई बार महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं और बीमारी लंबे समय तक पता ही नहीं चलती।

डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर जागरूक होना बहुत जरूरी है, क्योंकि दर्द या परेशानी को सहना कोई मजबूरी नहीं होना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसी 5 बीमारियों के बारे में जो महिलाओं में ज्यादा देखी जाती हैं।

थायरॉइड की समस्या

भारत में लगभग हर 10 में से 1 महिला को थायरॉइड की समस्या होती है। थायरॉइड गले के सामने मौजूद एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो शरीर में कई जरूरी कामों को कंट्रोल करने वाले हार्मोन बनाती है। जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती तो वजन बढ़ना, थकान, बाल झड़ना, दिल की धड़कन तेज होना या पीरियड्स में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। थायरॉइड की दो मुख्य स्थितियां होती हैं, हाइपोथायरॉइडिज्म (कम सक्रिय) और हाइपरथायरॉइडिज्म (ज्यादा सक्रिय)। अच्छी बात यह है कि दवाओं से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

पीसीओएस (PCOS)

पीसीओएस महिलाओं में होने वाली एक आम हार्मोनल समस्या है। इसमें शरीर में एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसकी वजह से पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल आ सकते हैं, मुंहासे हो सकते हैं और गर्भधारण में दिक्कत भी आ सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, प्रजनन आयु की लगभग 10 से 13 प्रतिशत महिलाएं इस समस्या से प्रभावित हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कई महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उन्हें पीसीओएस है।

ऑटोइम्यून बीमारियां

ऑटोइम्यून बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) ही अपने स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इसमें रूमेटाइड आर्थराइटिस, क्रोहन डिजीज और कुछ थायरॉइड रोग शामिल हैं। ये बीमारियां अक्सर लंबे समय तक रहती हैं और इनके लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए लगातार इलाज और देखभाल की जरूरत होती है।

ऑस्टियोपोरोसिस

पहले इसे सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 30-40 साल की महिलाओं में भी कमजोर हड्डियों की समस्या बढ़ रही है। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों की घनत्व कम हो जाती है, जिससे वे कमजोर और आसानी से टूटने वाली हो जाती हैं। इसे साइलेंट डिजीज भी कहा जाता है, क्योंकि अक्सर लोगों को तब तक पता नहीं चलता जब तक हड्डी टूट न जाए।

आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया

आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया महिलाओं में बहुत आम है। मासिक धर्म, गर्भावस्था और खान-पान की कमी इसके बड़े कारण हैं। इसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं कम हो जाती हैं, जिससे थकान, कमजोरी, सांस फूलना और दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सही डाइट और आयरन सप्लीमेंट से इसे ठीक किया जा सकता है। महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही इलाज से इन बीमारियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अपनी सेहत का ख्याल रखना कोई स्वार्थ नहीं, बल्कि एक जरूरी जिम्मेदारी है।

Updated on:
10 Mar 2026 11:17 am
Published on:
10 Mar 2026 11:17 am
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