
कई रिसर्च में पुष्टि हो चुकी है कि महिलाओं और पुरुषों की शारीरिक बनावट के साथ मेटाबॉलिज्म में भी अंतर होता है। पुरुषों की तुलना में उन्हें ज्यादा पोषण वाला आहार लेना चाहिए। जबकि महिलाएं अपनी डाइट पर ज्यादा नहीं दे पाती हैं। उनकी दिनचर्या व्यस्त होती है। सेहत के लिए नियमितता के हिसाब से वे न तो रोज व्यायाम कर पाती हैं और न ही समय पर नाश्ता। एक्सपट्र्स की मानें तो हाउसवाइफ को भी फिटनेस के लिए हैल्दी रुटीन अपनाना चाहिए।
डाइट में इन्हें करें शामिल
डाइट में रोजाना कैल्शियम वाली चीजें जैसे दूध, दूध से बने उत्पाद, टमाटर, पालक, अखरोट और ओट्स भी लेना चाहिए। टमाटर में लाइकोपीन होता है जो ब्रेस्ट कैंसर और दिल की बीमारियों की आशंका कम करता है। पालक में विटामिन्स, मिनरल्स, और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होते हैं। पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्या जैसे सूजन, ब्रेस्ट-टेंडरनेस, ब्लोटिंग आदि में आराम देता है। अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स आदि होते हैं जो कैंसर से बचाते हैं।
बचाव के लिए रुटीन टेस्ट
महिलाओं में 40 वर्ष के बाद से कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। इसलिए 40 वर्ष की उम्र से कुछ निर्धारित जांचें डॉक्टरी सलाह से करवानी चाहिए। इससे कई गंभीर बीमारियों से बचाव होता है। रोजाना 30-40 मिनट व्यायाम भी करना चाहिए। कामकाजी के साथ गृहणियां भी इसका जरूर पालन करें।
तनाव को दूर रखें
तनाव से बचें। युवावस्था में अधिकतर बीमारियां तनाव से होती हैं। तनाव से बचने के लिए दिनचर्या अच्छी होनी चाहिए। प्राथमिकता के अनुसार काम करें। काम अपनी जगह है, लेकिन परिवार, दोस्तों के लिए भी समय निकालें। वह काम करें, जिसमें आपकी दिलचस्पी हो। जैसे क्राफ्टिंग, पेंटिंग या किताबें पढ़ें, कुछ नया सीखें। इससे रचनात्मकता बढ़ेगी। तनाव घटेगा।
आयुर्वेद के अनुसार खानपान
हर तरह की चीजें खाएं। इससे शरीर को मजबूती मिलती है लेकिन विरुद्ध आहार खाने से बचें। महिलाएं आहार में आंवला, जौ, शहद, सेंधा नमक, मुनक्का को नियमित शामिल करें। गर्मी में दही की जगह छाछ लें। नियमित दही खाने से शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) बढ़ जाता है। माहवारी के दिनों में जौ, चावल, घी, दूध और मिश्री ही खाएं। इससे माहवारी के साथ भविष्य में मधुमेह से भी बचाव होता है। जहां रहते हैं वहां होने वाली पैदावार और मौसमी चीजें खानपान में ज्यादा शामिल करनी चाहिए।