
लॉकडाउन (Lock Down) में घर से काम करने, नींद का पैटर्न बिगडऩे और स्क्रीन टाइम बढऩे से आंखों में सूखापन (Dry Eyes Syndrome) की समस्या बढ़ी है। चिकित्सकों के पास इससे जुड़े मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। दरअसल यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें आंखों सूखने से बचाने के लिए लिक्विड या आंसू उचित मात्रा में आंखों तक नहीं पहुंच पाते जिससे नमी कम होने से हमें आंखों में जलन और दर्द महसूस होता है। जलन, खुजली होना, किरकिरापन लगना, मलते पर आंखों का लाल पड़ जाना, पानी आना या पुतलियों का सिकुड़कर छोटा हो जाना आंखों में सूखापन की समस्या के सामान्य लक्षण हैं। अगर समस्या का सही समय पर उपचार कर लिया जाए तो सूखापन सोने या दादी-नानी के घरेलू नुस्खों से ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर ऐसी समस्या बार-बार हो रही है तो इसे नजरअंदाज न करें।
सूखेपन के प्रमुख कारण
-बिना ब्रेक लिए देर तक टीवी देखना, कम्प्यूटर लैपटॉप पर काम करना
-नजर के चश्मे की बजाय लंबे समय तक कॉन्टैक्ट लैंस का प्रयोग करना
-सामान्य वातावरण की बजाय वातानुकूलित जगह पर ज्यादा देर रहने से
-वायु प्रदूषण, दूषित पानी से आंखों को धोने या हथेलियों से मसलने पर
-सामान्य दिनचर्या में दर्द निवारक, उच्च रक्तचाप एवं अवसाद दूर करने वाली दवाओं के सेवन से
-विटामिन ए की कमी, सूजन या विकिरण से भी ऐसा हो सकता है
-50 साल से ज्यादा उम्र में भी आंखों में ड्राइनैस हो सकती है
-मुंहासे के इलाज के लिए प्रयोग की जाने वाली आइसोट्रेटीनियोन दवाओं से भी
ऐसे होती है आंखों में शुष्कता
दरअसल, हमारी आंखों में टियर फिल्म (Tear Film) होती है जो तीन परतों से मिलकर बनती है। इसकी सबसे अंदरुनी व महीन परत को म्यूकस लेयर कहते हैं। हमारे आंसू शरीर में मौजूद पानी, सोडियम क्लोराइड, सूसन और प्रोटीन से मिल कर बनते है। आंखों में सूखापन होने के कारण आंख में आंसू कम बनने लगते हैं। आंसू कॉर्निया एवं कन्जंक्टिवा को नम रखते हैं आंख को शुष्कता से बचाते है। इतना ही नहींये हमारी आंखों को संक्रमण से भी बचाते हैं। सबसे बाहरी परत को लिपिड या ऑयली लेयर कहा जाता है जो आंसू के सूखने से बचाती है और आँख की पलकों को चिकनाई प्रदान करती हैए जिससे हमें पलक झपकने में आसानी होती है। पलकों के अंदरूनी कोनों में जब निकासी नलिकाओं में प्रवाह होता है तब हमारी आंखों में सूखपेन की समस्या होती है। क्योंकि प्रवाह के कारण आंसू का बनना और बाहर आने में संतुलन नहीं रह जाता।
ऐसे पाएं सूखेपन से छुटकारा
-अधिक देर तक कम्प्यूटर के सामने न बैठें, निसमित अंतराल पर ब्रेक लेते रहें
-देर रात तक स्मार्टफोन का अधिक प्रयोग और टीवी देखने से बचें
-अपनी आंखों में सीधी हवा न लगने दें, प्रदूषण एवं धूप में चश्मा लगाकर निकलें
-अपने नियमित आहार में पोषक तत्वों को शामिल करें मुख्यत विटामिन ए जो कि आँखों के लिये बेहद जरूरी है
-कम्प्यूटर पर ज्यादा देर तक काम करना हो तो आंखों में गुलाब जल डालें और ठंडे पानी से धोएं
-ताजा फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और नट्स जिनमें ओमेगा 6 फैटी एसिड होते है खाएं, क्योंकि शोध के अनुसार फैटी एसिड्स, विटामिन बी-6, विटामिन सी और डी को बढ़ाने से 10 दिनों के भीतर आंसू उत्पादन में वृद्धि होती है।
-व्यायाम की कमी, अस्वस्थ जीवनशैली, धूम्रपान, एल्कोहल का सेवन या अत्यधिक तनाव से बचें
-ऐसे रोगियों में पोटाशियम बहुत कम होता है, इसलिए गेहूं के बीज, बादाम, केले, किशमिश, अंजीर और एवोकाडो भी खाएं
-एलोवेरा जेल को पानी में मिलाकर इससे आंखों को धोने से आंखों में सूखेपन की समस्या से राहत मिलती है
-कच्चे आलू की ठंडी स्लाइस को आंखों पर 15 से 20 मिनट तक रखें
-आंवले का रस पीने से भी ड्राई आई सिंड्रोम में लाभ होता है
-गुलाब जल का नियमित रूप से इस्तेमाल करें
-खीरे के गोल टुकड़ों को आंखों पर 10 से 15 मिनट रखने पर भी सूखेपन में आराम मिलता है