स्वास्थ्य

पार्किंसन्स : आराम करते समय ही हाथ-पैरों में होता कंपन

पार्किंसन्स एक न्यूरोडिजेनरेटिव विकार है। डोपामाइन ब्रेन का ईंधन होता है। इससे जुड़ी समस्या है पार्किंसन।

less than 1 minute read
Apr 12, 2021
पार्किंसन्स : आराम करते समय ही हाथ-पैरों में होता कंपन
पार्किंसन्स : आराम करते समय ही हाथ-पैरों में होता कंपन

पार्किंसन्स एक न्यूरोडिजेनरेटिव विकार है। डोपामाइन ब्रेन का ईंधन होता है। इससे जुड़ी समस्या है पार्किंसन। इसके मरीजों में सुस्ती आने लगती है। यह बढ़ती उम्र के साथ होता है। ज्यादातर 60 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में आशंका बढ़ जाती है। इसका निदान और इलाज संभव है।
हाथों में कंपन्न, सुस्ती, शरीर में जकडऩ, याद्दाश्त में कमी और रात में बुरे सपने आना आदि। इस रोग में मरीज के शांत बैठने पर भी हाथों में कंपन होता है। काम करने पर कंपन नहीं होता है। मरीज की लिखावट छोटी होना, आवाज हल्की होना और चेहरे पर भाव की कमी होना आदि लक्षण हैं।
60 वर्ष से ऊपर आयु वाले व्यक्तियों, महिलाओं की तुलना में पुरुषों, जिनको यह आनुवांशिक परेशानी है और जो लोग कीटनाशक व रसायनों से जुड़े क्षेत्र में काम करते हैं। उनमें इसका खतरा अधिक रहता है। ऐसे लोगों को पहले से ध्यान रखना चाहिए। योग-व्यायाम करते रहना चाहिए।
इ सके लक्षणों को देखकर डॉक्टर पता लगा लेते हैं। इसमें केवल दिमाग की एमआरआइ कराते हैं। इलाज में शुरू के 5-7 दिनों तक डोपामाइन की गोलियां कारगर होती हैं। इसके बाद इनका असर कम होने लगता है। फिर कुछ मरीजों में सर्जरी और कुछ में पेसमेकर जैसी डिवाइस लगाने की जरूरत पड़ती है।
पार्किंसन्स में योग-व्यायाम और हैल्दी डाइट का अधिक असर पड़ता है। देखने में आया है कि जो लोग रोज 30 मिनट योग-व्यायाम करते हैं उनमें इसका खतरा सामान्य लोगों की तुलना में चार-पांच गुना तक कम होता है। इसी तरह हैल्दी डाइट भी इसमें बहुत जरूरी है। जिन्हें यह समस्या हो गई है उन्हें भी योग-व्यायाम करना चाहिए। इससे तेजी से रिकवरी होती है। दवाओं का साइड इफेक्ट भी कम होता है।

Published on:
12 Apr 2021 08:50 pm