
आप घर पर ही अपनी सेहत को मॉनिटर कर सकते हैं। ऐसे बहुत से गैजेट्स आ गए हैं, जिनके जरिए घर बैठे सेहत के प्रति अवेयर रहा जा सकता है। आजकल लोग हेल्थ गैजेट्स का काफी इस्तेमाल भी कर रहे हैं और शरीर की गतिविधियों पर ध्यान दे रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य की स्थिति को जानने के लिए चिकित्सक का परामर्श और टेस्ट जरूरी है। लेकिन कुछ ऐसे गैजेट्स भी हैं, जो सेहत के प्रति कुछ क्लूज दे सकते हैं।
चेयर स्टैंड टेस्ट
मांसपेशियों की ताकत को मापने के लिए 5-बार चेयर स्टैंड टेस्ट करें। चिकित्सकों के मुताबिक पुरुषों को कुर्सी पर बैठे स्थान से 5 बार खड़े होने में 10 सेकंड से अधिक और महिलाओं को 11 सेकंड से अधिक समय लगता है। इससे भी आपकी सेहत का पता लगाया जा सकता है।
एक्सरसाइज के दौरान हार्ट रेट
एक्सरसाइज के दौरान हृदय गति (एचआर) को घड़ी या छाती के पट्टे से मापा जा सकता है। यदि आप मीडियम एक्सरसाइज कर रहे है तो हृदय गति अधिकतम हृदय गति का लगभग 50-70 प्रतिशत होना चाहिए, जबकि तेज एक्सरसाइज के दौरान यह अधिकतम हृदय गति का लगभग 70-85 प्रतिशत तक होना चाहिए। लेकिन यह इससे अधिक होता है और हार्ट की कमजोर फिटनेस की ओर संकेत देता है।
हार्ट रेट
आप घर से ही अपनी हार्ट रेट का मॉनिटर कर सकते हैं, आजकल ऐसी स्मार्टवॉच आ रही हैं, जो इस तरह का सॉल्यूशन देती हैं। सामान्य हार्ट रेट 60-100 बीट प्रति मिनट के बीच होती है। आप अपनी हार्ट रेट को आसानी से माप सकते हैं। यदि आपकी हार्ट रेट नियमित रूप से ज्यादा रहती है, तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
बीपी: डिजिटल बीपी मशीनों के जरिए बीपी आसानी से मापा जा सकता है। सामान्य बीपी 90/60 और 120/80 mmHg के बीच मापा जाता है। जिनका बीपी 140/90 एमएमएचजी से ज्यादा है, उन्हें हाई बीपी माना जाता है और जिनका बीपी 90/60 एमएमएचजी से कम है, उन्हें लो बीपी माना जाता है। हाई बीपी दिल के दौरे और स्ट्रोक के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है। यह हार्ट की बीमारियों को संकेत करता है। वहीं खड़े होने पर चक्कर आने वाले लोगों को पोस्टुरल हाइपोटेंशन से बचने के लिए खड़े होने और लेटने की स्थिति में अपना बीपी जांचना चाहिए।
बॉडी मास इंडेक्स : आप मास इंडेक्स के जरिए घर रहते हुए सेहत का अंदाजा लगा सकते हैं। इससे मोटापा और वजन में कमी की जांच की जा सकती है। उम्र के साथ यदि आपके चलने की गति सही रहती है, तो फिट है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।