होशंगाबाद

बहनों ने दी भाई केे अर्थी को कंधा, छोटी बहन ने दी मुखाग्नि

टूटती रुढ़ियां, मजबूत होते रिश्ते इटारसी के जीन मोहल्ले के रहने वाले परिवार की कहानी लाॅकडाउन में पांच लोगों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की मिली थी अनुमति
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Updated: 13 May 2020, 12:39 PM IST
बहनों ने दी भाई केे अर्थी को कंधा, छोटी बहन ने दी मुखाग्नि
बहनों ने दी भाई केे अर्थी को कंधा, छोटी बहन ने दी मुखाग्नि

कोरोना के खौफ ने अपने अपनों के दुःख की घड़ी में भी मुंह फेरने को मजबूर कर दिया है लेकिन हमारे समाज में घटित कई ऐसी घटनाएं रिश्तों में बची संवेदना का सुकून भी दर्ज करा जाते हैं। महामारी में जहां पुत्र अपने पिता के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच रहा, वहीं बहनों ने अपने बड़े भाई का अंतिम संस्कार करते हुए सभी कर्मकांड खुद कर नजीर पेश की है।

दरअसल, इटारसी में हाॅटस्पाॅट के रुप में चिंहित जीन मोहल्ला के नेहरु गंज के रहने वाले बजरंग बहादुर सिंह यादव 55 काफी दिनों से कैंसर से पीड़ित थे। इधर, कुछ महीनों में उनकी हालत काफी बिगड़ती चली गई। लाॅकडाउन के दौरान ही बजरंग बहादुर की मौत हो गई।
परिजन ने अंतिम संस्कार की अनुमति मांगी तो प्रशासन की ओर से एसडीएम सतीश राय ने पांच लोगों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी।

मंगलवार को बजरंग बहादुर सिंह यादव की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो दोनों बहनों अंजू यादव व मंजू यादव सहित पांच लोग शामिल हुए। दोनों बहनों ने भाई की अर्थी को कंधा देकर श्मशान तक पहुंचवाया। वहां अंजू (30) ने ही सारे कर्मकांड करवाए। इटारसी के खेड़ा गोकुलनगर स्थित शांतिधाम श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार वहां के सदस्य प्रमोद पगारे ने अंजू के हाथों संपन्न कराया। नेहरुगंज के पूर्व पार्षद संजय चौधरी इस परिवार की मदद में पूरे वक्त मौजूद रहे।
अंजू यादव ने बताया कि तीन बहनों व एक भाई में सबसे बड़े उनके भाई बजरंगबहादुर सिंह यादव ही थे। वह काफी दिनों से कैंसर से जूझ रहे थे। इन दिनों हालत काफी बिगड़ गई और उनको बचाया नहीं जा सका।

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