अटल जी ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की। अटल जी की अपील के बाद पूरे रामलीला मैदान में सन्नाटा छा गया,
नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं रहे। बीजेपी के साथ-साथ देश के इतिहास के दिग्गज नेता अटल जी का निधन 16 अगस्त को दिल्ली के एम्स में हुआ। शाम 05:05 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस ली, वे 93 वर्ष के थे। अटल जी लंबे समय से बीमार थे.. उन्हें किडनी ट्रैक्ट इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, सीने में जकड़न जैसी कई समस्याएं थीं। अटल जी की नाज़ुक तबियत की खबर सुनने के बाद एम्स में देश के दिग्गज नेताओं का तांता लग गया। बीजेपी के तमाम छोटे-बड़े नेताओं के साथ ही वहां विपक्षी पार्टियों के अनेक नेता भी उनका हाल-चाल जानने के लिए एम्स पहुंचे। लेकिन देश के दिग्गज डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी अटल जी को बचाया नहीं जा सका।
अटल बिहारी वाजपेयी उन नेताओं में शामिल थे, जिनकी जनसभा में कभी भी लोगों की भीड़ को बुलाना नहीं पड़ा। अटल जी के भाषण सुनने के लिए हज़ारों लोग खुद-ब-खुद उनकी जनसभा में पहुंच जाते थे। अटल जी का भाषण सुनने वाले लोगों की संख्या इतनी ज़्यादा हो जाती थी कि उन्हें काबू करने में कई लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। अटल जी की जनसभा में आया कोई भी शख्स अटल जी का पूरा भाषण सुने बगैर वहां से उठता नहीं था। अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी भाषा के ज्ञानी थे। हिंदी पर अटल जी की ज़बरदस्त पकड़ थी। अटल जी के पास हिंदी के ऐसे ताकतवर और प्रभावशाली शब्दों का भंडार था, जिससे वे सभा में आई जनता को अपनी ओर आकर्षित कर लेते थे। अटल जी अपने भाषण में ऐसे-ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते थे, जिसे सुनने के बाद देश की जनता उनकी दीवानी हो गई।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1975 में आपातकाल की घोषणा कर दी थी। इंदिरा गांधी के इस फैसले का विपक्षी दलों ने जमकर विरोध किया था। इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का विरोध अटल जी ने भी किया था। विपक्षी दलों के ज़बरदस्त विरोध के बाद इंदिरा गांधी ने हार मान ली और 1977 में चुनाव कराने का ऐलान कर दिया गया।
आपातकाल के बाद देश की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित की गई। दिल्ली में हुई इस रैली में अटल बिहारी वाजपेयी जैसे ही भाषण देने पहुंचे, वहां इकट्ठी हुई जनता 'इंदिरा गांधी मुर्दाबाद' और 'अटल बिहारी जिंदाबाद' के नारे लगाने लगे। अटल जी ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की। अटल जी की अपील के बाद पूरे रामलीला मैदान में सन्नाटा छा गया, जिसके बाद अटल जी ने कहा- 'बाद मुद्दत मिले हैं दीवाने।' अटल जी के ये पांच शब्द सुनने के बाद रामलीला मैदान एक बार फिर जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। थोड़ी देर शांत रहने के बाद वाजपेयी जी ने कहा- 'कहने सुनने को बहुत हैं अफसाने।' अब इस वाक्य को सुनने के बाद जनता फिर ज़ोर-ज़ोर से नारे लगाने लगी तो अटल जी को एक बार फिर जनता को शांति बनाए रखने की अपील करनी पड़ी। अटल जी की अपील के बाद जनता एक बार फिर एकदम शांत पड़ गई..कुछ ही पल बाद अटल जी ने कहा, 'खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी भला कौन जाने।' अटल जी के भाषण के दौरान इन तीन वाक्यों ने पूरे देश को उनका दीवाना बना दिया।