Ayodhya Verdict : विवादित जमीन पर रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों ने सुनाया फैसला बाबर के सेनापति मीर बाकी की थी इसमें अहम भूमिका
नई दिल्ली। सालों से चले आ रहे अयोध्या विवाद पर आखिरकार फैसला आ गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की पीठ ने इस पर अपना निर्णय दिया है। उन्होंने जमीन पर रामलला के दावे को सही पाया है। मगर क्या आपको पता है इस विवादित जमीन पर बाबरी मस्जिद बनाने के पीछे बाबर का नहीं बल्कि किसी और शख्स का हाथ था। उसका नाम मीर बाकी (Mir Baqi) है। वह मुगल सम्राट बाबर का सेनापति था।
मीर को उसके जानने वाले शाघावाल, बाकी बेग और बाकी मिंगबाशी कहकर बुलाते थे। बाबरनामा में मीर बाकी को ताशकंद के नाम से भी जाना जाता है। मीर बाकी ने अयोध्या की विवादित जमीन पर बाबरी मस्जिद बनवाया था। उसका मकसद बाबर को अमर बनाना था। मीर बाकी बाबर के सबसे विश्वसनीय सेनापतियों में शुमार था। मीर मूल रूप से ताशकंद का रहने वाला था। इससे पहले मीर को लाहौल के पास बल्ख (अब अफगानिस्तान) में हुए विद्रोह को काबू करने की जिम्मेदारी मिली थी।
ताशकंद के कमांडर मीर बाकी को उसकी क्रूरता के लिए जाना जाता था। इसके अलावा वह वास्तुकला में भी काफी दिलचस्पी रखता था। उसकी पारखी नजर और कलाकारी की परख के चलते उसे लोग खूब मानते थे। उसने बाबर के लिए बाबरी मस्जिद को बड़े भव्य तरीके से बनवाया था। इसकी खूबसूरती को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। बताया जाता कि ये उस दौर में उत्तरप्रदेश की सबसे बड़ी मस्जिद हुआ करती थी।