Ayodhya Verdict : स्कंद पुराण समेत अन्य धार्मिक ग्रंथों में राम जन्म भूमि को लेकर लिखी गई हैं ये बातें जजों ने फैसला सुनाते समय खुदाई में मिले अवशेषों को बनाया आधार
नई दिल्ली। अयोध्या में विवादित जमीन को लेकर कई सालों से चल रहा बवाल आखिरकार थम गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की पीठ ने इस पर फैसला सुनाया है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के दावे को सही पाया है। इसके लिए ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया गया है। जजों की बेंच ने ये फैसला कानूनी सबूत के आधार पर लिए हैं। उनके इस फैसले में 15 साल पहले खुदाई में मिली चीजों ने अहम भूमिका निभाई है।
कोर्ट ने इस मसले पर अपना फैसला सुनाते समय भारतीय पुरातत्विक सर्वेक्षण मतलब आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के खास बिंदुओं को ध्यान रखा है। अदालत का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर 15 साल पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई ने खुदाई की थी। उस दौरान विवादित ढांचे के नीचे प्राचीन मंदिर के अवशेष मिले थे। वैज्ञानिकों की जांच में पाया गया कि ये सतयुग काल के हैं। क्योंकि मुगल साम्राज्य बाद में आया था। जबकि इससे पहले हिंदुओं का शासन था। ऐसे में पहले मंदिर बनने की बात सामने आई थी।
पद्म पुराण और स्कंद पुराण में भी राम जन्म स्थान का सटीक ब्यौरा मिला है। पुराणों के अनुसार इस जमीन पर पहले मंदिर हुआ करता था। मगर 1528 में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाया गया था। कोर्ट ने फैसला सुनाते समय हिंदू पक्ष की दलील को तवज्जो दी है। दलील के अनुसार पुरातत्व विभाग की खुदाई में कसौटी पत्थर के खंबे मिले थे। जिसमें हिंदू देवी देवताओं के चित्र नक्काशी के जरिए बनाए गए थे। ऐसे में ये जगह हिंदू धार्मिक स्थान की निशानी है।