1.6 करोड़ से अधिक लोग इस कोरोना महामारी (Corona epidemic) से संक्रमित हो चुके हैं। वहीं लगभग 6.5 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हर देश कोरोना वैक्सीन(corona vaccine ) खोजने में लगा हुआ है लेकिन अभी तक किसी के हाथ सफलता नहींं लगी है। वहीं इस वायरस को लेकर कई नए खुलासे भी हो रहे हैं।
नई दिल्ली। दुनिया भर में कोरोना (corona) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ताजे आकंड़े के मुताबिक 1.6 करोड़ से अधिक लोग इस महामारी (Corona epidemic) से संक्रमित हो चुके हैं। वहीं लगभग 6.5 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हर देश कोरोना वैक्सीन खोजने में लगा हुआ है लेकिन अभी तक किसी के हाथ सफलता नहींं लगी है। वहीं इस वायरस को लेकर कई नए खुलासे भी हो रहे हैं। कुछ का कहना है कि मजबूत इम्यून सिस्टम (Strong immune system) के साथ कोरोना खत्म हो जाता है वहीं कुछ का कहना है कि कोरोना (CORONA) ठीक होने के बाद भी कई तरह के रोग दे जाता है।
इन सब के बीच अमेरिका के लॉस एंजिल्स (Los Angeles of America) के रहने वाले एक शख्स ने लोगों को कोरोना को लेकर गंभीरता दिखाने लिए कहा है। शख्स का नाम ग्रेग गारफील्ड (Greg Garfield) है। ग्रेग कोरोना संक्रमित होने के बाद 2 महीने तक हॉस्पिटल में भर्ती थे। इलाज के दौरान उनको गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उनके हाथों की ज्यादातर उंगलियां काटनी पड़ीं।
54 साल के ग्रेग (Greg Garfield) बताते हैं कि जब कोरोना (Corona) उनके देश में फैलना शुरु हुआ था वे तभी इसके चपेट में आ गए थे। वे बताते हैं कि वे अपने कुछ दोस्तों के साथ इटली घूमने गए थे। वहां से आने के कुछ दिन बाद वे बीमार पड़ गए। इसके बाद उन्होंने अपनी जांच करवाई और पता चला वे कोरोना संक्रमित हैं। इतना ही नहीं उनके साथ-साथ साथ गए दोस्त भी कोरोना संक्रमित पाए गए।
अमेरिका के एक हॉस्पिटल में कोरोना के पहले मरीज ( first COVID-19 patient ) के तौर पर ग्रेग को भर्ती किया गया था। भर्ती होने के दूसरे दिन ही उनकी हालत बिगड़ने लगी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। डॉक्टर ने उनके बचने का अनुमान महज 1 फीसदी लगाया था।
ग्रेग (Gregg Garfield) के फेफड़ों में गंभीर तकलीफ के साथ-साथ सेप्सिस और किडनी और लीवर फेल होने से भी उन्हें जूझना पड़ा। उन्हें ठिक होने में 64 दिन लग गए। इनमें से 31 दिन वे वेंटिलेटर (Ventilator) पर रहे 8 मई को उन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। लेकिन इन कुछ दिनों में उनकी जिंदगी बदल गई। कोरोना ने उन्हें अपंग बना दिया था। उनके दोनों हाथों की उंगलियों को काटना पड़ा है। उनके डॉक्टर ने बताया कि खून के प्रवाह में दिक्कत की वजह से अंगुलियां काटनी पड़ीं।