ज़रा सोचिए उस मां पर क्या गुज़र रही होगी जिसने आखिरी बार अपने लाल की बलाएं लेते हुए घर से विदा किया होगा।
नई दिल्ली।पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के घर का माहौल दिल दुखाने वाला है। पूरा देश गुस्से से भरा हुआ है। हर किसी की मांग है कि आतंकियों को उनके इस नापाक काम के लिए सरकार जल्द से जल्द कोई कठोर सज़ा उठाए। ज़रा सोचिए उस मां पर क्या गुज़र रही होगी जिसने आखिरी बार अपने लाल की बलाएं लेते हुए घर से विदा किया होगा। उस पिता पर क्या गुज़र रही होगी जिसने अपने कलेजे पर पत्थर रखकर अपने बेटे को सेना में भर्ती कराया होगा। ऐसा ही एक किस्सा है कुलविंदर सिंह का जो अपने परिवार के इकलौते चिराग थे और वो भी अपने परिवार को आखिरी यादों के साथ छोड़कर चले गए। सीआरपीएफ की 92वीं बटालियन में सिपाही कुलविंदर सिंह 10 फरवरी को ही 10 दिनों की छुट्टी काटकर ड्यूटी पर वापस लौटे थे। उनकी आखिरी बार अपने परिवार से 12 फरवरी को फोन पर बात की थी। सिपाही कुलविंदर सिंह अपने पिता से नए घर को पेंट करवाने की बात कर रहे थे।
फोन पर पिता से घर पेंट करवाने की बात कुलविंदर इसलिए कर रहे थे कि नवंबर महीने में उनकी शादी होने वाली थी। घर का कार्य लगभग पूरा हो चुका था। पिता दर्शन सिंह पूरा घर अपनी देख-रेख में बनवा रहे थे। 14 फरवरी की सुबह शहीद कुलविंदर सिंह ने अपनी मंगेतर से फोन पर बात की थी। शहीद कुलविंदर सिंह की अभी कुछ दिनों पहले ही मंगनी हुई थी। शहीद कुलविंदर सिंह की मंगेतर को क्या पता था वह उनसे की गई आखिरी बात होगी। मंगेतर से बात करते समय कुलविंदर सिंह ने बताया कि वह जम्मू पहुंचने के बाद वो अपने काफिले के संग कश्मीर जा रहे हैं। उनके घरवालों के लिए वह घड़ी कितनी मुश्किल होगी जब कुलविंदर सिंह की बॉडी की शिनाख्त उनकी अंगूठी से की गई। शहीद कुलविंदर के पिता ने अपने सपूत की शहादत के बाद उनकी वर्दी पहनकर देश के प्रति अपना जज्बा दिखाया।