इंडोनेशिया में लंबे समय से जारी थी ईवीएम को लेकर बहस इन देशों में EVM की सिक्योरिटी और एक्यूरेसी को लेकर उठे हैं सवाल इंग्लैंड और फ्रांस में कभी नहीं हुआ ईवीएम इस्तेमाल
नई दिल्ली।भारत के चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के प्रयोग को लेकर राजनीतिक दलों में हमेशा कोई न कोई बहस छिड़ी रहती है। कुछ लोग ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हैं तो कुछ लोग इसके इस्तेमाल को पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं। भारत की तरह इंडोनेशिया में भी काफी लंबे समय से ईवीएम को लेकर बहस जारी है। यहां के राजनीतिक दलों में सहमति न बनने के बाद इंडोनेशिया ( Indonesia ) में वापस बैलेट पेपर पर चुनाव हुए। जानकारी के लिए बता दें कि इंडोनेशिया में हाल ही में राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं। जिसमें बैलेट पेपर है इस्तेमाल हुआ है।
इंडोनेशिया का लोकतंत्र दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र है। अमरीका की तरह यहां भी राष्ट्रपति शासन लागू है। इंडोनेशिया की तरह ऐसी कई देश हैं जहां आज भी चुनाव बैलेट पेपर पर ही होते हैं। इंग्लैंड , फ्रांस , जर्मनी , नीदरलैंड और संयुक्त राज्य अमरीका ने भी ईवीएम के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कई देशों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की सिक्योरिटी और एक्यूरेसी को लेकर सवाल उठे थे जिसके बाद इनकी कई दिनों तक जांच हुई। नीदरलैंड की बात करें तो यह देश इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन इस्तेमाल करने वाला दुनिया का सबसे पुराना देश था। लेकिन इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठने पर यहां साल 2006 में ईवीएम पर बैन लगा दिया गया।
जबकि 2009 में जर्मनी की सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम को असंवैधानिक बता दिया। इसी तरह नतीजों के बदले जाने की आशंका को लेकर इटली ने भी ईवीएम पर बैन लगा दिया गया था। वहीं इंग्लैंड और फ्रांस की बात करें तो यहां कभी ईवीएम का इस्तेमाल हुआ ही नहीं। टेक फ्रेंडली देश अमरीका के कई राज्यों में बिना पेपर ट्रोल वाली ईवीएम मशीन बैन है।