एक रिपोर्ट के अध्ययन के मुताबिक भारत में फिलहाल 1365 मातृभाषाएं हैं, जिनका क्षेत्रीय आधार अलग-अलग है।
नई दिल्ली। हर साल 21 फरवरी को इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे सेलिब्रेट किया जाता है। इस डे का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाना है। इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे के दिन UNESCO और UN दुनियाभर में भाषा और कल्चर से जुड़े अलग-अलग तरह के खास कार्यक्रम आयोजित कराते हैं।
इस दिन को टंग डे ( Tongue Day ), मदर लैंग्वेज डे ( Mother language Day ) और मदर टंग डे ( Mother Tongue Day ) और लैंग्वेज मूवमेंट डे ( Language Movement Day ) और Shohid Dibosh के नाम से भी जाना जाता है। हर साल इस खास दिन का एक खास थीम होती है।
इस बार का थीम है, “Indigenous languages matter for development, peacebuilding, and reconciliation”. यूनेस्को ने साल 1999 में प्रतिवर्ष 21 फरवरी को इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे मनाए जाने की घोषणा की थी। भारत दुनिया के सबसे ज्यादा विविधताओं से भरा देश है।
यहां रूप-रंग-संस्कृति-भाषा-बोलियां यहां अलग-अलग परिधान भारत को और खास बना देती हैं, इसलिए हमारे देश के लिए इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे के खास मायने है। एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 1961 की जनगणना के अनुसार भारत में 1652 भाषाएं बोली जाती हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में फिलहाल 1365 मातृभाषाएं हैं, जिनका क्षेत्रीय आधार अलग-अलग है।
क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे
साल 1952 में इस दिन यानि 21 फरवरी को ढाका यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन पाकिस्तान ( Pakistan ) सरकार की भाषायी नीति की खिलाफत करते हुए अपनी मातृभाषा का अस्तित्व जिंदा रखने के लिए विरोध प्रदर्शन किया था।
पाकिस्तान की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते हुए गोलियां बरसानी शुरू कर दी लेकिन लगातार विरोध के बाद सरकार को बांग्ला भाषा को आधिकारिक भाषा का दर्जा देना पड़ा। इस दौरान शहीद हुए युवाओं की स्मृति में यूनेस्को ने पहली बार 1999 में 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया।