
मलमास में आने वाली एकादशी को 'परमा एकादशी' कहा जाता है। इस एकादशी को पुरुषोत्तम एकादशी, हरिवल्लभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। परमा एकादशी का भारतीय शास्त्रों में अत्यधिक महत्व बताया गया है। इस दिन किए गए उपाय व्यक्ति का भाग्य बदलने की क्षमता रखते हैं और उसे अपार सुख, संपत्ति देते हैं।
दुर्लभ सिद्धियां प्राप्त करने के लिए है उत्तम मुहूर्त
ज्योतिषियों के अनुसार परमा एकादशी को दुर्लभ तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए बहुत ही उत्तम मुहूर्त माना जाता है। इस दिन विशेष तंत्र साधनाएं तथा पूजा-पाठ किए जाते हैं। आमजन भी इस दिन व्रत तथा मंत्र जाप कर मनचाही इच्छाओं की पूर्ति का वरदान प्राप्त कर सकते हैं।
ये हैं परमा एकादशी पूजा के शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार इस बार परमा एकादशी 12 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 38 मिनट पर ही प्रारंभ हो चुकी है तथा 13 अक्टूबर (मंगलवार) को दोपहर 02 बजकर 35 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी। 13 अक्टूबर को दिनभर एकादशी व्रत किया जाएगा। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के समापन से पूर्व करने का विधान है। एकादशी व्रत का पारण 14 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 21 मिनट से सुबह 08 बजकर 40 मिनट तक किया जा सकेगा।
इस दिन करें ये उपाय
परमा एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना करने का विधान है। इस दिन एकादशी व्रत, विष्णु सहस्रनाम, श्रीसूक्त, पुरुषसूक्त, भागवत पाठ तथा श्रीमदभागवत गीता का पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है।
इसके साथ ही भगवान विष्णु की पूजा के बाद यथासंभव जरूरतमंदों को भोजन करवाएं। दूसरों को विद्या, अन्न, भूमि अथवा गौ दान करें। किसी जरूरतमंद की सहायता करें। इस दिन घर में चावल नहीं पकाना चाहिए तथा दिन भर पूर्ण ब्रह्मचर्य के व्रत का पालन करना चाहिए।