हां इसमें कोई दो राय नहीं कि, पश्चिमी सभ्यता और हमारी सभ्यता में बहुत अंतर है। अब उदाहरण के तौर पर ही ले लीजिए, जैसे भारत में बच्चों को छोटे से माता-पिता अपनी निगरानी में पालते-पोसते हैं।
नई दिल्ली।हिंदुस्तान और विदेशों के कल्चर में ज़मीन आसमान एक अंतर है। चाहे वो खाना-पीना हो, रहन-सहन हो या कुछ और। लेकिन यह ज़रूरी तो नहीं कि हम उनके कुछ संस्कार अपना नहीं सकते या वो हमारे। आज के समय में हर व्यक्ति अपना भला बुरा समझता है उसे पता है कि उसके लिए या उसके परिवार के लिए क्या अच्छा है और क्या गलत। हां इसमें कोई दो राय नहीं कि, पश्चिमी सभ्यता और हमारी सभ्यता में बहुत अंतर है। अब उदाहरण के तौर पर ही ले लीजिए, जैसे भारत में बच्चों को छोटे से माता-पिता अपनी निगरानी में पालते पोसते हैं। हमारे यहां बच्चों को कुछ हो ना जाए उन्हें कोई तकलीफ ना हो इस वजह से वे उन्हें बचपन से ही अपने पास सुलाते हैं। वहीं विदेशों में सब उल्टा है यहां दूध मुंहे बच्चे उनके इतने छोटे पर से ही अलग होता है। यहां मां बाप बच्चों के साथ नहीं सोते। वेस्टर्न कंट्रीज में को-स्लीपिंग का चलन नहीं है।
इस बात को लेकर वेस्टर्न कंट्रीज का यह तर्क है कि, नींद में माता-पिता के किसी अंग या शरीर के नीचे दबकर बच्चे का दम घुट सकता है। इसी वजह से अलोरा और उनके बच्चों की फोटो देख सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। क्योंकि इससे सडेन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम खतरे बढ़ जाते हैं। नॉर्वे आदि देशों में स्वास्थ्य विभाग पेरेंट्स को सलाह देता है कि छोटे बच्चों को भी अपने साथ ना सुलाएं। अब ऐसे में यह महिला देखते ही देखते इंटरनेट पर लोगों के गुस्से का शिकार हो गई। गुस्साए लोगों ने महिला को काफी भला बुरा कहा जिसके बाद इस मां जिनका नाम अलोरा ब्रिंक्ली ने सफाई देते हुए कहा कि, जहां तक को-स्लीपिंग की बात है, तो ये मेरे हसबैंड की पोस्ट का मुद्दा नहीं था। हम सब इस बारे में जागरूक हैं कि बतौर पैरेंट्स हम बच्चों के साथ क्या नहीं कर सकते। इसकी लिस्ट बच्चों के साथ क्या कर सकते हैं की लिस्ट से लंबी है।