दरअसल, इन लोगों ने डॉक्टर पर ऐसा आरोप इसलिए लगाया था कि कोई और मामला इस केस के आगे दब जाए।
नई दिल्ली। उसके साथ बर्बरता की गई लेकिन वह टूटी नहीं। जो उसने किया है वो कोई वीरांगना ही कर सकती है। रेप पीड़िता थी वो उसके साथ हैवानियत हुई थी लेकिन वो हारी नहीं उसने अपना केस कोर्ट में खुद ही लड़ा। इस बीच ना जाने उसे क्या क्या सहना पड़ा लेकिन उसने इस लड़ाई को जारी रखा और अंत में उसकी जीत ही हुई। अब आपको लग रहा होगा यह घटना विदेश की ही तो आपको बता दें यह हुआ है भारत में, जी हां, अपने हिंदुस्तान में जहां ऐसा बस फिल्मों में सुनने को मिलता है। लेकिन उसकी यह लड़ाई मामूली नहीं थी उसे इस बीच बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केरल की रहने वाली और पेशे से डॉक्टर 30 वर्षीय रेप पीड़िता के खिलाफ बीते साल राजेश बाबू नाम के एक शख्स ने शिकायत दर्ज कराई थी कि, राजेश ने आरोप लगाया था कि रेप पीड़िता ने खुलेआम सड़क पर कार पार्किंग के दौरान उसके साथ झगड़ा किया और फिर थप्पड़ भी मारा। उसने बताया कि इस महिला डॉक्टर ने उन्हें अपशब्द भी कहे। दरअसल, इन लोगों ने डॉक्टर पर ऐसा आरोप इसलिए लगाया था कि कोई और मामला इस केस के आगे दब जाए।
जानकारी के लिए बता दें कि जब झगड़े की असली वजह सामने आई तो जज भी हैरान रह गए। असल में , झगड़े का यह पूरा केस झूठा था। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि रेप पीड़िता को दूसरे मामले में फंसाकर रेप के मामले को दबाया जा सके। इस कारण रेप पीड़िता को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा लेकिन अंत तक वह न्याय के लिए अकेले ही जंग-ए-मैदान में डटी रही। इस बीच उसके साथ जो-जो हुआ वह हैरान कर देने वाला है। फैसले से राहत मिलने के बाद, रेप पीड़िता ने कहा कि वह अपने साथ हुई इस घटना में दो बिंदुओं का उल्लेख करना भूल गई। जब उसने पूछा कि उसने खुली अदालत में खुद का प्रतिनिधित्व क्यों किया, तो उन्होंने बताया कि जिसके साथ यह हैवानियत हुई है, उसके अलावा कोई और व्यक्ति दस्तावेजों और साक्ष्यों को ठीक ढंग से पेश नहीं कर सकता है। इसके अलावा, पीड़िता ने आरोप लगाया कि सामाजिक न्याय विभाग ने उसकी मदद नहीं की उन्होंने बताया कि ऐसे विभाग केवल नाम के हैं।