
नई दिल्ली: घाटी पर दहशतगर्दों आैर आतंकवादियों के हमले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। दहशत के साये में जी रहे जम्मू-कश्मीर के लोग किस कदर परेशान हैं, ये किसी से छिपा नहीं है। रमजान के इस पाक महीने में भी आतंकवादी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। लेकिन, इन सबके बीच घाटी से कलेजे को ठंडक पहुंचाने वाला एक वीडियो सामने आया है। ये वीडियो देखने के बाद आपको पता चल जाएगा कि जम्मू-कश्मीर में इंसानियत आैर सांप्रदायिक सौहार्द आज भी किस कदर जिंदा है।
दरअसल, सोशल मीडिया पर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का एक वीडियो वायरल हो रहा है। 21 सेकेंड के इस वीडियो में एक बुजुर्ग सिख सुबह तड़के ड्रम बजाकर रोजेदारों को सुहूर के लिए उठा रहा है। बुजुर्ग कह रहा है, ''अल्लाह रसूल दे प्यारों, जन्नत दे तलाबगारों, उठो रोजा रखो।''
पेश की सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
बता दें, साधारण तौर पर ये काम वहां के मुस्लिम लोग ही करते हैं, लेकिन एक सिख ने एेसा काम करके सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है।
त्योहार की तरह मनाया जाता है रमजान
रमजान के इस महीने को मुस्लिम समुदाय में त्योहार की तरह मनाया जाता है। इस्लाम धर्म में इस महीने का बहुत महत्व है, क्योंकि यह मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा रोजे रखने का समय होता हैं। इन दौरान दिन में न ही कुछ खाया और न ही कुछ पिया जाता है। रमजान रहमतों और बरकतों का महीना है। इस दौरान मन से बुरे विचार निकाल कर पवित्र और सच्चे मन से अल्लाह को याद किया जाता है। इस महीने के बारे में यह कहा जाता है कि इस महीने में जितनी हो सकते उतनी गरीबों की मदद करनी चाहिए तभी इबादत से राजी होकर खुदा बेपनाह रहमतें बरसाता है।
रमजान के महीने का महत्व
इस महीने के बारे में पवित्र कुरान में लिखा गया है कि रमजान के पवित्र महीने में ही अल्लाह ने पैगम्बर साहिब को अपने दूत के रूप में चुना था। रमजान में मन को शुद्ध रखना बहुत जरूरी है, खाने के अलावा खाने के बारे में भी इस समय नहीं सोचना चाहिए। तभी रोजा पूरा होता है। इसके साथ ही रोजा रखने के दौरान व्यक्ति का पूरी तरह से अपने मन पर संयम रखना जरूरी है।
रमजान महीने के तीन दौर
रमजान के 30 दिनों के महीनो के तीन भागों में बांटा जाता है। इस महीने के पहले 10 दिनों के दौर को 'रहमतों का दौर' बताया गया है। अगले 10 दिनों को 'माफी का दौर' और आखिरी 10 दिनों को 'जहन्नुम से बचाने का दौर' पुकारा जाता है।