
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी अदालतसुप्रीम कोर्ट ने सालों से चले आ रहे अयोध्या मामले पर शनिवार को अपना फैसला सुनाया। उन्होंने रामलला को विवादित जमीन का असल मालिक माना। साथ ही मुस्लिम पक्ष यानि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही विवादित जमीन से अलग 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है। लेकिन इन सबके बीच सोशल मीडिया पर कॉल रिकॉर्डिंग को लेकर एक मैसेज काफी वायरल हो रहा है।
किया जा रहा है ये दावा
फेसबुक और वॉट्सऐप्प पर एक मैसेज काफी वायरल हो रहा है। इस वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि अयोध्या पर फैसले को लेकर नए कम्मुनिकेशन नियम लागू होने वाले हैं। इन नियमों में सभी कॉल रिकॉर्ड करने से लेकर जनता के डिवाइस को मंत्रालय के सिस्टम से जोड़ने तक का दावा किया गया है। वॉट्सऐप्प पर वायरल मैसेज में लिखा है ‘सारे कॉल रिकॉर्ड किए जाएंगे। सभी रिकॉर्डिंग स्टोर होगी। वॉट्सऐप, फेसबुक , ट्विटर और सोशल मडिया की ट्रैकिंग होगी। आपके डिवाइस मंत्रालय के सिस्टम से कनेक्ट हो जाएंगे।’
सच क्या है
हमने इस वायरल संदेश की पड़ताल कि तो हमने पाया कि ये मैसेज पूरी तरह गलत और फेक है। इस मैसेज द्वारा लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। अयोध्या पुलिस ने भी इसी फर्जी खबर का खंडन किया। उन्होंने अपने ट्विटर पर एक अखबार की कटिंग लगाकर लिखा 'सोशल मीडिया के माध्यम से अशांतिक फैलान की हो रही है नाकाम कोशिश।' वहीं उत्तर प्रदेश पुलिस के आधिकारिक ट्विटर पर उन्होंने इस खबर को फर्जी बताया।