Blakiston Fish Owl : पूरी दुनिया में महज 1000 से 1900 के बीच बची है ब्लैक्सिटन फिश आउल की आबादी इन्हें बचाने के लिए की जा रही है पहल, ब्रीडिंग सेंटर बनाने की है प्लानिंग
नई दिल्ली। शहरीकरण के चलते ग्लोबल वाॅर्मिंग बढ़ती जा रही है। जिसका खामियाजा हाल ही में चमोली त्रासदी में देखने को मिला। जहां ग्लेशियर टूटने से पानी का सैलाब आ गया। वहीं दूसरी तरफ इससे जंगली जीव-जंतुओं का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। हाल ही में एक रिपोर्ट में पता चला कि दुनिया का सबसे बड़ा उल्लू खतरे में है। इसका नाम ब्लैक्सिटन फिश आउल है। ये विलुप्ति के कगार पर जा पहुंचा है। क्योंकि इसकी तेजी से घटती संख्या चिंता का कारण बनी हुई है। जानकारों के मुताबिक इनकी संख्या टाइगर्स से भी ज्यादा कम हो गई है।
यह आकार में काफी बड़े होते हैं। इस उल्लू के पंख फैलने पर 6 फीट चौड़े हो जाते हैं। नर का वजह 3.6 किलोग्राम तक होता है। जबकि मादा का वजन लगभग 4.6 किलोग्राम तक हो सकता है। मादा नर से आकार में 25 फीसदी ज्यादा बड़ी होती है। आमतौर पर यह रूस के सुदूर पूर्वी इलाकों, जापान और एशिया में पाए जाते हैं। ये ऐसे पुराने पेड़, झील के किनारे, नदी या झरने के आसपास रहना पसंद करते हैं। मगर लगातार शहरीकरण से इनके घर छिनते जा रहे हैं। जिसकी वजह से इनकी संख्या तेजी से घट रही है।
ब्लैक्सिटन फिश आउल दिखने में ग्रेट ईगल आउल की तरह ही दिखते हैं। हालांकि रंग में थोड़ा रहता है। इनकी चार उप-प्रजातियां पाई जाती हैं। इनकी आंखें पीली होती हैं। फिलहाल पूरी दुनिया में इनकी आबादी 1000 से 1900 के बीच ही बची है। ऐसे में इन्हें बचाने के लिए व्लादिवोस्तोक स्थित ईस्ट एशिया टेरेस्ट्रियल बायोडायवर्सिटकी के फेडरल साइंटिफिक सेंटर की पीएचडी स्कॉलर राडा सरमैक आगे आई हैं। उनका कहना है कि वे इन उल्लुओं की प्रजाति को बचाने के लिए ब्रीडिंग सेंटर जैसी व्यवस्था करेंगे। साथ ही लोगों को इनका शिकार करने और इनके घर तोड़ने से मना करेंगे।