
प्रतिभागियों ने कहा कि अहिंसा का वास्तविक अर्थ केवल हिंसा से दूर रहना नहीं, बल्कि व्यवहार में प्रेम, करुणा और संयम को स्थान देना है। मन में किसी के प्रति बुरा भाव रखना और कटु शब्दों का प्रयोग करना भी रिश्तों में दूरी पैदा करता है। इसलिए अहिंसा का पालन विचारों और वाणी में भी होना चाहिए। महिलाओं ने क्षमा को आत्मबल का प्रतीक बताते हुए कहा कि किसी की गलती को माफ करना कमजोरी नहीं है। क्षमा करने से मन का बोझ हल्का होता है और रिश्तों में विश्वास व मधुरता फिर से कायम हो सकती है। छोटी-छोटी बातों को लेकर मन में नाराजगी रखने के बजाय क्षमा का भाव अपनाना परिवार और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक है। प्रतियोगिता में यह संदेश भी सामने आया कि संयमित वाणी, सकारात्मक सोच और दूसरों की भावनाओं का सम्मान दैनिक जीवन में अहिंसा और क्षमा को व्यवहार में उतारने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ये केवल धार्मिक सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन को सहज, शांत और मधुर बनाने वाले व्यवहारिक संस्कार हैं।
प्रतियोगिता में मोनिका बाफना ने प्रथम, सलौनी खींवेसरा ने द्वितीय और सीमा बाफना ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। खुशबू कोठारी और पूजा भंसाली को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया। साध्वी हर्षपूर्णाश्री ने विजेताओं के नामों की घोषणा की। कार्यक्रम में रमेश भंसाली विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्री पार्श्व-लब्धि पाठशाला स्नात्र मंडल की सदस्य टीना शाह, अंकिता गादिया, प्रिया ओसवाल, हिमांशी भंडारी, पूजा ओसवाल, पूनम शाह, सरिता कवाड़, रवीना गादिया और जीया पोरवाल समेत अन्य महिलाएं उपस्थित थीं।