
अच्छी यादों को अपनाएं, बुरी यादों को छोड़ें
साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अच्छी और बुरी दोनों प्रकार की स्मृतियां होती हैं। जब हम श्वास बाहर छोड़ें तो बुरी यादों को भी बाहर निकालने का भाव रखें और जब श्वास भीतर लें तो अच्छी यादों को अपने अंदर स्थान दें। जीवन को आनंदमय और तनावमुक्त बनाने का यह सरल उपाय है।
उन्होंने कहा कि छोटी सोच व्यक्ति को कभी ऊंचाइयों तक नहीं पहुंचा सकती। दुनिया में हिमालय से भी ऊंचा वह व्यक्ति है जिसकी सोच बड़ी और सकारात्मक होती है।
जीवन छह तार वाले गिटार की तरह
साध्वी ने जीवन की तुलना छह तार वाले गिटार से करते हुए कहा कि जैसे मधुर संगीत के लिए गिटार के सभी तारों का संतुलित होना आवश्यक है, वैसे ही जीवन में भी शरीर, मन, अध्यात्म, परिवार, व्यवसाय और समाज इन छह क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। यदि इनमें से किसी एक की भी उपेक्षा की जाए तो जीवन का संतुलन बिगड़ जाता है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से अपने परिवार, व्यवसाय और सामाजिक दायित्वों के साथ-साथ आत्मिक उन्नति के लिए भी समय निकालने का आह्वान किया। इस अवसर पर विहाररत अचलगच्छीय साध्वी नयगुणाश्री एवं रक्षगुणाश्री का साध्वीवृंद के साथ स्नेहमिलन भी हुआ। वहीं कल्याण से आए अंकित परमार, सन्नी कुमार एवं दर्शना ने दर्शन-वंदन एवं सेवा का लाभ प्राप्त किया।