
श्री वासुपूज्य स्वामी श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ, केशवापुर में आयोजित धर्मसभा में उद्बोधन देते आचार्य एवं मौजूद श्रावक-श्राविकाएं।
भोगों के मार्ग पर चलकर कभी संतुष्टि नहीं
आचार्य ने कहा कि जैसे सैकड़ों नदियों का जल मिलने पर भी समुद्र तृप्त नहीं होता, सैकड़ों शवों के दाह संस्कार के बाद भी श्मशान शांत नहीं होता और हजारों टन लकडिय़ां जलाने पर भी अग्नि की भूख समाप्त नहीं होती, उसी प्रकार पांचों इन्द्रियों के विषय-भोगों का उपभोग करने पर भी मनुष्य का मन कभी संतुष्ट नहीं होता। उन्होंने आगमों का उल्लेख करते हुए कहा कि जीव अनादिकाल से अनेक जन्मों में राजा, देव और विभिन्न योनियों में जन्म लेकर असंख्य भोगों का अनुभव कर चुका है, लेकिन आज तक उसे तृप्ति प्राप्त नहीं हुई। भविष्य में भी केवल भोगों से तृप्ति संभव नहीं है। आचार्य ने राजा ययाति का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने हजारों वर्षों तक भोग-विलास का जीवन बिताया, फिर भी संतोष प्राप्त नहीं कर सके। मृत्यु के समय उन्होंने संसार को यही संदेश दिया कि भोगों के मार्ग पर चलकर कभी संतुष्टि नहीं मिलती।
इन्द्रियों की आसक्ति विनाश का कारण
उन्होंने ज्ञानसार ग्रंथ का उल्लेख करते हुए बताया कि हाथी स्पर्श, मछली स्वाद, भंवरा सुगंध, पतंगा रूप और हिरण मधुर ध्वनि के मोह में अपना जीवन गंवा देते हैं। जब एक-एक इन्द्रिय की आसक्ति इतनी घातक हो सकती है, तो पांचों इन्द्रियों के विषयों में डूबे मनुष्य की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
आचार्य ने कहा कि उपनिषदों में भी स्पष्ट कहा गया है कि भोगों का उपभोग करने से नहीं, बल्कि उनका त्याग करने से वास्तविक आनंद प्राप्त होता है। क्षणिक सुखों के लिए मनुष्य पाप कर्म बांधता है और बाद में उन्हीं कर्मों के कारण दु:खों का सामना करता है। उन्होंने कहा कि जैसे बबूल बोने वाले को कांटे और प्याज बोने वाले को दुर्गंध सहन करनी पड़ती है, वैसे ही पाप करने वाले को दु:ख और दुर्गति का सामना करना पड़ता है। इसलिए जीवन की इस उल्टी दिशा को बदलते हुए धर्म और सदाचार का मार्ग अपनाना चाहिए। आचार्य ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि यदि कभी परिस्थितिवश कोई गलती हो जाए तो उसके प्रति पश्चाताप का भाव रखें, लेकिन धर्म के कार्यों को कभी बोझ न समझें। प्रत्येक धार्मिक क्रिया को श्रद्धा, आनंद और अहोभाव के साथ करना चाहिए।
युवा शिविर 28 जून को
संघ की ओर से जानकारी दी गई कि 28 जून, रविवार को प्रात: 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक एल.टी.एस. शिविर क्रमांक-27 का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर युवा प्रवचनकार पंन्यास नयरक्षितविजय मेक लाइफ एक्साइटिंग विषय पर युवाओं और युवतियों को संबोधित करेंगे।
Updated on:
25 Jun 2026, 5:14 PM IST
Published on:
25 Jun 2026, 5:13 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.