
हुब्बल्ली का शिरडी साईं बाबा मंदिर।
विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन
धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ मंदिर सामाजिक सेवा के कार्यों में भी सक्रिय है। मंदिर परिसर में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए नि:शुल्क आवास एवं भोजन की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में लगभग 20 बच्चे यहां निवास कर रहे हैं और उनकी देखभाल की जा रही है। मंदिर में प्रतिवर्ष तीन प्रमुख धार्मिक महोत्सव गुरु पूर्णिमा, रामनवमी और साईं बाबा समाधि उत्सव (दशहरा)भव्य रूप से मनाए जाते हैं। प्रत्येक आयोजन एक सप्ताह से अधिक समय तक चलता है, जिसमें भजन-कीर्तन, प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। हर गुरुवार को मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस अवसर पर भक्तों को नि:शुल्क प्रसाद वितरित किया जाता है।
मानव सेवा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना
साईं सेवा के विस्तार की दिशा में मंडल एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर भी कार्य कर रहा है। मंडल द्वारा कलघटगी रोड स्थित कुरुविनकोप्पा गांव में 14 एकड़ भूमि पर साईं परिवार वृद्धाश्रम का निर्माण कराया जा रहा है। आगामी तीन से चार वर्षों में तैयार होने वाले इस वृद्धाश्रम में लगभग 600 बुजुर्गों के रहने की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मंदिर का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के जरूरतमंद वर्गों की सेवा कर साईं बाबा के सबका मालिक एक और मानव सेवा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।
सेवा में मिला जीवन का संतोष और समाधान
श्री शिरडी साईं सद्भक्त मंडल के सचिव ब्रज मोहन भूतड़ा कहते हैं, वर्ष 1988 से मैं मंदिर से जुड़ा हुआ हूं और प्रतिदिन बाबा के दर्शन के लिए जाता हूं। जो भी कार्य करता हूं, उसे बाबा की सेवा और पूजा मानकर करता हूं। अपने प्रत्येक कर्म का फल उनके चरणों में समर्पित कर स्वयं को उनकी शरण में छोड़ देता हूं। उन्होंने कभी किसी अपेक्षा के साथ सेवा नहीं की। केवल श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के भाव से बाबा की सेवा करते हुए जीवन व्यतीत किया है। इसी निस्वार्थ भाव का परिणाम है कि उन्हें जीवन में चहुंमुखी विकास, आत्मिक संतोष और हर परिस्थिति में समाधान प्राप्त हुआ है। सच्ची भक्ति का अर्थ मांगना नहीं, बल्कि समर्पण करना है। जब मनुष्य अपने अहंकार और कर्मों का भार ईश्वर के चरणों में रख देता है, तब उसका जीवन सहज, सरल और आनंदमय बन जाता है। बाबा की कृपा से उन्हें यही अनुभूति प्राप्त हुई है और आज भी वे उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ सेवा-पथ पर अग्रसर हैं।
Published on:
25 Jun 2026 04:56 pm
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