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हिरियूर उपचुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल, पूर्व मंत्री सुधाकर के बेटे सुहास हुए सक्रिय

कर्नाटक के हिरियूर विधानसभा क्षेत्र में संभावित उपचुनाव की आहट के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पिछले महीने चार बार विधायक रहे और पूर्व मंत्री डी. सुधाकर के निधन के बाद उनके पुत्र सुहास सुधाकर सक्रिय राजनीति में उतरने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं। क्षेत्र में संभावित उपचुनाव को देखते हुए वे लगातार समर्थकों और स्थानीय नेताओं से संपर्क कर रहे हैं।
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MP Congress मध्य प्रदेश कांग्रेस Demo pic (photo: patrika)

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संभावित उम्मीदवार के रूप में चर्चा
सूत्रों के अनुसार किसी दिवंगत विधायक या नेता के परिवार के सदस्य को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाना भारतीय राजनीति में एक सामान्य रणनीति रही है। इसी कड़ी में सुहास सुधाकर का नाम भी संभावित उम्मीदवार के रूप में चर्चा में है। हालांकि उनकी मां हर्षिणी सुधाकर को भी सहानुभूति वोट मिलने की संभावना बताई जा रही है, लेकिन वे चुनाव लडऩे के प्रति उत्सुक नहीं हैं।

संभावित उम्मीदवार के रूप में चर्चा
सूत्रों के अनुसार किसी दिवंगत विधायक या नेता के परिवार के सदस्य को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाना भारतीय राजनीति में एक सामान्य रणनीति रही है। इसी कड़ी में सुहास सुधाकर का नाम भी संभावित उम्मीदवार के रूप में चर्चा में है। हालांकि उनकी मां हर्षिणी सुधाकर को भी सहानुभूति वोट मिलने की संभावना बताई जा रही है, लेकिन वे चुनाव लडऩे के प्रति उत्सुक नहीं हैं।

कांग्रेस में कई दावेदार
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिवंगत डी. सुधाकर ने जैन समुदाय से होने के बावजूद सीमित मतदाता आधार के बीच तीन बार जीत हासिल की थी। कांग्रेस में पूर्व विधायक पूर्णिमा श्रीनिवास और नेता आर. मंजुनाथ समेत कई नेता टिकट के दावेदार माने जा रहे हैं।

सीट पर जेडीएस की भी नजर
उधर जेडीएस अपने सहयोगी भाजपा से यह सीट अपने लिए छोडऩे की मांग कर रही है। पार्टी का तर्क है कि हिरियूर में उसका संगठनात्मक आधार भाजपा की तुलना में अधिक मजबूत है। दोनों दलों के कार्यकर्ता सीट बंटवारे को लेकर पार्टी नेतृत्व के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। एक जेडीएस नेता ने कहा कि पार्टी ने केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी से भाजपा नेतृत्व को हिरियूर सीट जेडएस के लिए छोडऩे के लिए मनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह सीट क्षेत्र में पार्टी के अस्तित्व और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

उपचुनाव पर टिकी निगाहें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उपचुनाव होता है तो कांग्रेस दिवंगत नेता के परिवार को उम्मीदवार बनाकर सहानुभूति की लहर का लाभ उठाने का प्रयास कर सकती है। वहीं भाजपा और जेडीएस गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे का फैसला चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाएगा। ऐसे में हिरियूर का संभावित उपचुनाव राज्य की राजनीति में खास महत्व रखेगा।