
शांतिनाथ गौशाला को आकार देने में निभाई अहम भूमिका
करीब दो दशक पहले बुदरसिंघी स्थित शांतिनाथ गौशाला के निर्माण में वे प्रमुख लोगों में शामिल रहे। प्रारंभ में यह गौशाला करुणा मंदिर परिसर में संचालित होती थी। बाद में ट्रस्ट का गठन कर गौशाला की स्वयं की भूमि खरीदी गई और लगभग एक दशक पहले गौशाला को बुदरसिंघी स्थानांतरित किया गया। आज यहां 140 से अधिक गौवंश का संरक्षण किया जा रहा है।
दस हजार रुपए से शुरू हुई गौशाला, आज सेवा का बड़ा केंद्र
भैरूलाल जैन बताते हैं कि करीब ढाई दशक पहले हंगल के निकट तिलवली में विश्व हिंदू परिषद की गौशाला की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उस समय विहिप की पदाधिकारी डॉ. नरेगल ने गौशाला बनाने की इच्छा जताई। इसके बाद दस एकड़ भूमि की फेंसिंग कराई गई। लगभग 50 लोगों से 250 और 500 रुपए का सहयोग लेकर करीब दस हजार रुपए जुटाए गए और उसी राशि से गौशाला की नींव रखी गई। आज यह गौशाला सेवा का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है।
जहां भी गौशाला, वहां सहयोग के लिए हमेशा तैयार
उनका उद्देश्य केवल अपनी गौशाला तक सीमित नहीं रहा। वे मानते हैं कि जहां भी गौसेवा हो रही है, वहां सहयोग करना प्रत्येक समाजसेवी का दायित्व है। इसी भावना से वे विभिन्न गौशालाओं को आर्थिक और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास करते रहे हैं। करीब डेढ़ दशक पहले उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध भजन एवं गौसेवा प्रेरक कलाकार अशोक जमावत जैन को हुब्बल्ली आमंत्रित कर विशेष कार्यक्रम आयोजित कराया। इस आयोजन से प्राप्त सहयोग राशि गौवंश के चारे और सेवा कार्यों में लगाई गई।
सुझाव से बदली भांवरी गौशाला की तस्वीर
राजस्थान के पाली जिले के निकट भांवरी गांव में संचालित गौशाला की प्रगति में भी उनका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा। लगभग एक दशक पहले जब मांगीलाल घांची उनके पास पहुंचे, तब उन्होंने सलाह दी कि छोटे स्तर से शुरुआत कर धैर्यपूर्वक आगे बढ़ें। उस समय गौशाला में केवल 30-40 गायें थीं, जबकि आज वहां लगभग 300 गौवंश का संरक्षण किया जा रहा है।
करुणा संदेश से फैलाया सेवा का संदेश
गौसेवा के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक जागरूकता के लिए करुणा संदेश नामक पाक्षिक समाचार पत्र का भी प्रकाशन किया। हुब्बल्ली से प्रकाशित यह पत्र कई वर्षों तक सेवा, संस्कार और सामाजिक गतिविधियों का माध्यम बना। बाद में परिस्थितियों के कारण इसका प्रकाशन बंद करना पड़ा।
देशभर के सेवाभावियों को जोडऩे का अनूठा सपना
भैरूलाल जैन का एक बड़ा सपना था कि देशभर में सेवा कार्य करने वाले लोगों को एक मंच पर जोड़ा जाए। इसी उद्देश्य से उन्होंने सेवा स्वराज नाम से एक विशेष डायरेक्टरी तैयार करने का अभियान शुरू किया। उन्होंने स्वयं देशभर के सेवाभावी लोगों को प्रतिदिन चार-पांच पत्र लिखकर संपर्क किया। होसपेट के बलदूता नायके, चेन्नई की एडवोकेट रश्मि जैन, दिल्ली की कृष्णाकुमारी सहित लगभग एक हजार सेवाभावी लोगों के नाम-पते और संपर्क विवरण भी एकत्रित किए। हालांकि विभिन्न कारणों से यह डायरेक्टरी प्रकाशित नहीं हो सकी, लेकिन उनका यह प्रयास समाज को जोडऩे की अनूठी पहल माना जाता है।
सेवा करने वाले साथ आएं, तभी बदलाव आएगा
भैरूलाल जैन का मानना है कि समाज में सेवा करने वाले लोगों की कमी नहीं है, लेकिन वे आपस में समन्वय और सहयोग के साथ काम नहीं कर पाते। यदि सभी सेवाभावी लोग एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ें, तो समाज में सेवा कार्यों का दायरा कई गुना बढ़ सकता है। उनका स्पष्ट संदेश है कि सेवा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब सेवाभावी लोग मिलकर काम करेंगे, तभी समाज में स्थायी और व्यापक परिवर्तन संभव होगा।