लोकतंत्र की सबसे संवेदनशील प्रक्रिया में इस तरह की स्थिति का पैदा होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। चुनाव सिर्फ परिणाम का नाम नहीं है, बल्कि प्रक्रिया की पारदर्शिता और उस पर जनता के भरोसे का भी नाम है।
दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव की मतगणना से पहले ईवीएम कक्ष की चाबियों का गायब होना और फिर ताला तोड़कर कक्ष खोलना, यह घटना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि पूरे चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता की परीक्षा है। लोकतंत्र की सबसे संवेदनशील प्रक्रिया में इस तरह की स्थिति का पैदा होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। चुनाव सिर्फ परिणाम का नाम नहीं है, बल्कि प्रक्रिया की पारदर्शिता और उस पर जनता के भरोसे का भी नाम है। जब मतगणना शुरू होने से पहले ही यह खबर सामने आती है कि सुरक्षित कक्ष की चाबियां नहीं मिल रहीं, तो स्वाभाविक रूप से संदेह की स्थिति बनती है। भले ही अधिकारी यह स्पष्ट करें कि ईवीएम सुरक्षित थीं और किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं हुई, लेकिन जो दृश्य सामने आया, हथौड़े और औजारों से ताला तोडऩे का। वह भरोसे को झटका देने के लिए काफी है।
यह घटना ऐसे समय पर हुई जब उपचुनाव पहले से ही राजनीतिक रूप से बेहद अहम माने जा रहे थे। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई थी। ऐसे माहौल में इस तरह की लापरवाही न सिर्फ प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाती है, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को भी हवा देती है। विपक्ष के लिए यह मुद्दा बन सकता है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष के लिए सफाई देना चुनौती बन जाती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी महत्वपूर्ण और उच्च सुरक्षा वाली व्यवस्था में इस तरह की चूक कैसे हो सकती है। क्या स्ट्रॉन्गरूम की चाबियों का कोई वैकल्पिक प्रबंध नहीं था? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी? या फिर यह मामला भी कुछ समय बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि चुनावी व्यवस्था केवल तकनीकी मजबूती से नहीं, बल्कि प्रशासनिक सतर्कता और जवाबदेही से भी मजबूत होती है। अगर छोटी-छोटी लापरवाहियां इसी तरह नजरअंदाज होती रहीं, तो वे आगे चलकर बड़े संकट का कारण बन सकती हैं। अंतत:, यह सिर्फ एक ताला टूटने की घटना नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र के उस भरोसे पर चोट है, जिसे बनाए रखना सबसे जरूरी है। अब जरूरत है कि इस घटना से सबक लिया जाए, प्रक्रियाओं को और सख्त किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा ही न हो।
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