
छोटे गांव से निकलकर बड़ी उपलब्धियां हासिल
राजस्थान के जालोर जिले के सांकरना गांव की मूल निवासी देविका वर्तमान में हुब्बल्ली में रहकर विज्ञान वर्ग में कक्षा 11 की पढ़ाई कर रही हैं। उनके पिता रविन्द्र सिंह पुरोहित तथा माता संतोषी पुरोहित ने शुरू से ही उन्हें शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया। देविका की यह कहानी बताती है कि यदि परिवार, शिक्षक और स्वयं का संकल्प साथ हो तो छोटे गांव से निकलकर भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। देविका पुरोहित की सफलता निश्चित रूप से अन्य विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में आगे बढऩे की प्रेरणा देगी।
सातवीं से ही खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया
देविका ने पहली से दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई भगिनी निवेदिता विद्यालय नवनगर हुब्बल्ली से की। इसी दौरान उन्होंने खेलकूद, शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में लगातार उल्लेखनीय प्रदर्शन कर अपनी अलग पहचान बनाई। देविका ने कक्षा सातवीं से ही खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू कर दिया था। लगातार अभ्यास और मेहनत का परिणाम यह रहा कि दसवीं कक्षा के दौरान उन्होंने स्कूल स्तर पर शॉट पुट (गोला फेंक), डिस्कस थ्रो (चक्र फेंक) तथा शतरंज (चेस) में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद क्लस्टर स्तर पर भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा। उन्होंने शॉट पुट (गोला फेंक) तथा हैमर थ्रो (हथौड़ा फेंक) में प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) प्रतियोगिता में भी भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। तालुक स्तर पर हैमर थ्रो (हथौड़ा फेंक) में 19.28 मीटर का थ्रो करते हुए तीसरा स्थान प्राप्त किया।
सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिताओं में भी छाप छोड़ी
केवल खेल ही नहीं, देविका पुरोहित ने सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिताओं में भी अपनी छाप छोड़ी। संस्कार कुसुम (श्लोक वाचन) प्रतियोगिता के क्लस्टर स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया। स्कूल में आयोजित भगवद्गीता श्लोक वाचन प्रतियोगिता में 15 श्लोक कंठस्थ सुनाकर भी तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा भारतीय शिक्षा प्रसार समिति धारवाड़ की ओर से आयोजित सामाजिक कार्य प्रतियोगिता में भी तीसरा स्थान प्राप्त किया।
पढ़ाई में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
देविका खेलों के साथ पढ़ाई में भी लगातार उत्कृष्ट रही हैं। दसवीं बोर्ड परीक्षा में उन्होंने संस्कृत विषय में 125 में से 124 अंक प्राप्त किए। वर्तमान में भी विज्ञान वर्ग के साथ संस्कृत विषय का अध्ययन कर रही हैं। उनका मानना है कि नियमित अध्ययन और समय प्रबंधन से खेल तथा शिक्षा दोनों में सफलता हासिल की जा सकती है।
परिवार और शिक्षकों का मिला भरपूर सहयोग
देविका अपनी सफलता का श्रेय स्कूल के पीटी शिक्षक सर्वेश पुजारी को देती हैं, जिन्होंने लगातार अभ्यास के लिए प्रेरित किया। माता-पिता ने भी हर कदम पर उनका साथ दिया। विशेष रूप से उनकी माता संतोषी पुरोहित ने स्वास्थ्य और पोषण का पूरा ध्यान रखा तथा नियमित जॉगिंग के लिए प्रेरित किया। उनके नाना शांतिलाल पुरोहित (सांथू) का समय-समय पर मिला मार्गदर्शन भी उनकी सफलता का महत्वपूर्ण आधार रहा।
नियमित अभ्यास जरूरी
देविका पुरोहित का कहना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास ही मंजिल तक पहुंचाते हैं। यदि बेटियां ठान लें तो वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। खेल और पढ़ाई दोनों को संतुलित रखते हुए अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढऩा चाहिए।